राजधानी के मामले में साहसिक साफ़गोई को लेकर किशोर उपाध्याय ने की मुख़्यमंत्री की प्रशंशा पर साथ में दागे कई सवाल 

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भराड़ीसैण को ग्रीष्म क़ालीन और देहरादून को राजधानी बनाये जाने के मुख्यमंत्री के बयान की पूर्व प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष किशोर उपाध्याय ने कड़ी आलोचना की है, लेकिन साथ-साथ राजधानी के मामले में साहसिक साफ़गोई के लिये प्रशंसा भी की है और कहा है कि राज्य विरोधी शक्तियों का चेहरा भी सामने आ गया है और अब स्पष्ट हो गया है कि भराड़ीसैण ग्रीष्म क़ालीन राजधानी के रूप में उत्तराखंड को दासता का एक झुनझुना थमा दिया गया है।अब साहेब लोग जब गर्मी में परेशान होंगे तो भराड़ीसैण में ठण्ड का मजा लेंगे और जब ठण्ड से परेशान होंगे तो देहरादून की गर्मी में मौज लेंगे।
उपाध्याय ने कहा कि ग़ैरसैण के लोग टकटकी लगाये मुख्यमंत्री की ओर देख रहे थे कि वे राज्य स्थापना दिवस पर ग़ैरसैण को ज़िला बना देंगे और कोरोना के कारण आर्थिक रूप से तबाह हुये प्रदेश वासियों के टैक्स माफ़ कर देंगे, बिजली और पानी के बिल तो माफ़ करेंगे ही, किसानों का क़र्ज़ माफ़ करेंगे, पर्यटन, परिवहन, लघु उद्यमियों-व्यापारियों के क़र्ज़ आदि माफ़ कर जनता को राहत देंगे, लेकिन उन्होंने इस त्यौहार के महीने के उत्साह को ख़त्म कर दिया है।बेरोज़गारी और महंगाई ने सभी सीमायें तोड़ दी हैं।राज्य घोर मन्दी की ओर बढ़ रहा है और डब्बल इंजिन कुंभकर्णी नीन्द में है।
उपाध्याय ने कहा कि राज्य आन्दोलन की भावनाओं पर यह सरकार तुषारापात कर रही है, जो सरकार नौकरशाही की तनख़्वाह देने के लिये मार्केट से क़र्ज़ उठा रही है, मुख्यमंत्री बतायें भराड़ीसैण के विकास के लिये वे 25 हज़ार करोड़ रू कहाँ से लायेंगे? उनको कौन सा कारूँ का ख़ज़ाना मिल गया है?और अब तो ऐसा आभाष हो रहा है की मुख्यमंत्री जी ग़ैरसैण को भू-माफ़ियाओं सौंपने जा रहे हैं.

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