Monday, March 9, 2026
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रिवर्स पलायन कर सुधीर ने सुधारी बंजर खेतों की रंगत

उत्तरकाशी। कोरोना काल में रिवर्स पलायन की पहाड़ों से कई सुखद तस्वीरें सामने आई हैं। देश-विदेश से गांव लौटे ग्रामीणों ने अपने खंडहर पड़े घरों को संवारने के साथ ही बंजर पड़ी भूमि पर हल जोतने का भी कार्य किया। रिवर्स पलायन कर गांव को गुलजार करने वाली एक ऐसी ही सुखद तस्वीर नौगांव के कंडारी गांव की है। गत वर्ष लॉकडाउन से जब विदेश में सुधीर गौड़ बेरोजगार हुए तो गांव लौट आए। यहां उन्होंने बंजर खेतों को आबाद करना शुरू किया। नतीजा ये रहा कि सुधीर गौड़ की कड़ी मेहनत रंग लाई और टमाटर, बींस, शिमला मिर्च, खीरा का अच्छा उत्पादन हुआ। इसके साथ ही उन्होंने सेब का बागीचा भी लगाया।

गत वर्ष 2020 में कोरोना संक्रमण फैलने से मलेशिया के एक होटल में काम करने वाले कंडारी गांव के सुधीर गौड़ की नौकरी चली गई। 27 मार्च 2020 को सुधीर गांव पहुंचा। उत्तरकाशी जिला मुख्यालय से 130 किलोमीटर दूर नौगांव ब्लाक का कंडारी गांव सड़क से जुड़ा हुआ है। क्वारंटाइन रहने के बाद 33 वर्षीय सुधीर ने गांव में 12 नाली की बंजर भूमि से झाड़ियां काटी और भूमि को आबाद किया। सुधीर ने बताया कि उसके परिवार के 10 सदस्यों ने भी उसके साथ खेती की उपजाऊ बनाने के लिए मदद की, जिनमें उसके भाई सुशील गौड़, सचिन व नितेश ने भरपूर सहयोग किया।

खेतों में नकदी फसल का उत्पादन शुरू किया। शिमला मिर्च, छप्पन कद्दू, बंद गोभी, मक्की, टमाटर, बैंगन, खीरा आदि का उत्पादन शुरू। जिससे अच्छी आय हुई। इस बार भी सुधीर को नगदी फसलों से अच्छी आय की उम्मीद है। इसके साथ ही उन्होंने 100 पेड़ का सेब का बागीचा भी लगाया, जिसमें अच्छी किस्म की सेब की प्रजाति के लिए उन्होंने हिमाचल से पौध मंगवाई है।

माता-पिता से मिली सीख

सुधीर गौड़ कहते हैं कि 12वीं की परीक्षा पास करके वे बाद उन्होंने देहरादून में होटल मैनेजमेंट का कोर्स किया। होटल मैनेजमेंट करने के बाद वर्ष 2009 से 2012 तक ताज पैलेस होटल में प्रशिक्षण लिया। 2013 में वे रूस गए। उसके बाद सिंगापुर, थाईलैंड और मलेशिया में होटल में नौकरी की है।

कोरोना संक्रमण के कारण नौकरी चली गई, लेकिन खेती किसानी के बारे में बचपन में माता-पिता के साथ ज्ञान मिला है। बचपन में खेती करने का बहुत शौक था। इस लिए खेती किसानी की प्रेरणा घर से मिली है। इस कार्य के लिए सुधीर गौड़ के पिता श्याम लाल गौड़ ने भी सुधीर का मनोबल बढ़ाया। साथ ही खेती किसानी का पारंपरिक ज्ञान भी दिया।

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