Sunday, March 8, 2026
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वन विभाग में हुए फेरबदल के तहत कई उप वन संरक्षक भी इधर से उधर, जानें- किसको क्या जिम्मेदारी

देहरादून। वन विभाग में किए फेरबदल के तहत कई वन संरक्षकों को भी इधर से उधर किया गया है। इसके अलावा दो मुख्य वन संरक्षकों सुशांत कुमार पटनायक व प्रसन्न कुमार पात्रो के पूर्व में हुए तबादला आदेश निरस्त किए गए हैं। पटनायक मुख्य वन संरक्षक गढ़वाल और पात्रो निदेशक देहरादून व हल्द्वानी जू के साथ ही वन पंचायत एवं सामुदायिक वानिकी के पद पर कार्य करते रहेंगे।

शासन की ओर से जारी स्थानांतरण आदेश के मुताबिक उप वन संरक्षक डा विनय कुमार भार्गव का तबादला पिथौरागढ़ से नियोजन एवं वित्तीय प्रबंधन देहरादून में किया गया है। उप वन संरक्षक डी थिरूज्ञानसंबदम को हरिद्वार वन प्रभाग में तैनाती दी गई है। वह अभी तक वन विकास निगम में प्रतिनियुक्ति पर थे। उप वन संरक्षक राजीव धीमान को देहरादून से नरेन्द्र नगर, धर्म सिंह मीणा को नरेन्द्र नगर से पर्यावरण संरक्षण और जलवायु परिवर्तन निदेशालय, मयंक शेखर झा को चम्पावत से भूमि संरक्षण निदेशालय, नितीशमणि त्रिपाठी को कालसी से देहरादून, डा कोको रोसे को टिहरी से पिथौरागढ़, अमित कंवर को केदारनाथ से उत्तराखंड वन संसाधन परियोजना, कल्याणी को कार्बेट टाइगर रिजर्व से चकराता, हिमांशु बागड़ी को बागेश्वर से जलागम निदेशालय (प्रतिनियुक्ति), कुंदन कुमार को हल्द्वानी से अनुसंधान वृत्त, आशुतोष सिंह को बदरीनाथ से उत्तराखंड वानिकी प्रशिक्षण अकादमी हल्द्वानी, नीरज कुमार को हरिद्वार से कार्बेट टाइगर रिजर्व में स्थानांतरित किया गया है। वन विकास निगम में प्रतिनियुक्ति पर कार्यरत इंद्र सिंह नेगी को केदारनाथ और प्रकाश चंद्र आर्य को कालागढ़ वन प्रभाग में तैनाती दी गई है।

उप वन संरक्षक दीप चंद्र पंत को हल्द्वानी से सिविल सोयम प्रभाग अल्मोड़ा, विनोद कुमार सिंह को टिहरी डैम-प्रथम टिहरी से टिहरी वन प्रभाग, सर्वेश कुमार को गोपेश्वर से बदरीनाथ वन प्रभाग, रमेश चंद्र कांडपाल को अल्मोड़ा से चम्पावत, दिनकर तिवारी को नैनीताल से बागेश्वर, बाबूलाल को टिहरी डैम-द्वितीय उत्तरकाशी से हल्द्वानी स्थानांतरित किया गया है।

कारणों व छवि को लेकर भी चर्चा

वनाधिकारियों के तबादले के मामले में इसके कारणों व छवि को लेकर भी चर्चा हो रही है। कार्बेट टाइगर रिजर्व के प्रकरण में तीन अफसरों को हटाया गया है, लेकिन एक को यथावत रखा गया है। इसके अलावा उप वन संरक्षकों में दो ऐसे हैं, जिन पर पूर्व में अनियमितता के आरोप रहे हैं।

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