Saturday, March 7, 2026
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संविधान दिवस पर सीएम धामी ने दिलाई उद्देशिका की शपथ, अभियोजन विभाग को मिलेंगी नई सौगातें

देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बुधवार को पुलिस लाइन देहरादून में आयोजित संविधान दिवस कार्यक्रम में भारत के संविधान की उद्देशिका की शपथ दिलाई। इस दौरान उन्होंने अभियोजन विभाग की पत्रिका का विमोचन भी किया। मुख्यमंत्री ने सभी को संविधान एवं विधि दिवस की शुभकामनाएं देते हुए संविधान निर्माता डॉ. भीमराव अंबेडकर को श्रद्धापूर्वक याद किया।

कार्यक्रम में मुख्यमंत्री धामी ने अभियोजन विभाग के लिए कई महत्वपूर्ण घोषणाएं कीं। उन्होंने बताया कि नए आपराधिक कानूनों के व्यापक प्रचार-प्रसार हेतु विभाग को विशेष सहायता राशि प्रदान की जाएगी। साथ ही विभाग के डिजिटलीकरण कार्यों को गति देने के लिए भी अतिरिक्त सहयोग दिया जाएगा। उत्कृष्ट कार्य करने वाले अभियोजन अधिकारियों के लिए पुरस्कार योजना शुरू करने और राज्य की विभिन्न बोलियों का प्रशिक्षण उपलब्ध कराने की भी घोषणा की गई।

मुख्यमंत्री ने कहा कि अभियोजन सेवा न्याय व्यवस्था का वह महत्वपूर्ण स्तंभ है, जो सत्य को प्रतिष्ठित करने और न्याय प्रक्रिया को पारदर्शी व प्रभावी बनाने में अहम भूमिका निभाती है। उन्होंने संविधान दिवस का महत्व बताते हुए कहा कि 26 नवंबर 1949 भारतीय इतिहास का स्वर्णिम दिन है, जब संविधान सभा ने भारतीय संविधान को औपचारिक रूप से स्वीकार किया था। 1979 में स्व. डॉ. लक्ष्मीमल्ल सिंघवी और सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन के प्रयासों से 26 नवंबर को विधि दिवस के रूप में मनाने की शुरुआत हुई। वर्ष 2015 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसे संविधान दिवस के रूप में राष्ट्रीय स्तर पर मनाने का निर्णय लिया।

सीएम धामी ने कहा कि प्रधानमंत्री के नेतृत्व में न्याय व्यवस्था को सशक्त, पारदर्शी और नागरिक-केंद्रित बनाने के लिए ऐतिहासिक कदम उठाए जा रहे हैं। “भारतीय न्याय संहिता 2023, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 और भारतीय साक्ष्य अधिनियम 2023” लागू कर न्याय प्रणाली को आधुनिक स्वरूप देने की दिशा में बड़ा बदलाव किया गया है। ई-कोर्ट्स प्रोजेक्ट, नेशनल ज्यूडिशियल डेटा ग्रिड, फास्ट ट्रैक कोर्ट्स, महिला एवं बाल अपराधों की त्वरित सुनवाई, टेलीकॉन्फ्रेंसिंग, डिजिटल केस मैनेजमेंट, मेडिएशन बिल जैसी पहलें न्याय व्यवस्था में पारदर्शिता और गति ला रही हैं। नए कानूनों में इलेक्ट्रॉनिक व डिजिटल रिकॉर्ड को सबूत के रूप में मान्यता मिलने से जांच और अभियोजन प्रक्रिया और अधिक वैज्ञानिक व प्रमाणिक बनी है।

उन्होंने कहा कि राज्य सरकार भी न्याय व्यवस्था के आधुनिकीकरण के लिए निरंतर प्रयासरत है। नए न्यायालय भवनों का निर्माण, पुरानी संरचनाओं का सुदृढ़ीकरण, डिजिटल कोर्ट्स, ई-फाइलिंग और वर्चुअल हियरिंग प्रणाली को और अधिक मजबूत किया जा रहा है। विधि शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाने, युवा अधिवक्ताओं को मेंटरशिप देने और महिला अधिवक्ताओं के लिए सुरक्षित वातावरण बनाने की दिशा में भी कार्य जारी हैं। नकल-विरोधी कानून और यूसीसी जैसे ऐतिहासिक फैसले भी इसी कड़ी का हिस्सा हैं।

कार्यक्रम में विधायक विनोद चमोली, सचिव गृह शैलेश बगोली, डीजीपी दीपम सेठ, निदेशक अभियोजन ए.पी. अंशुमान सहित पुलिस और अभियोजन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

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