Tuesday, March 10, 2026
Homeराज्यउत्तराखण्डसदन में विपक्ष का हंगामा, जिला स्तरीय विकास प्राधिकरण खत्म करने की...

सदन में विपक्ष का हंगामा, जिला स्तरीय विकास प्राधिकरण खत्म करने की मांग पर अड़े

विधानसभा सत्र के पहले दिन  धामी सरकार ने मंगलवार को 65571.49 करोड़ का बजट सदन में पेश किया था। बुधवार को उत्तराखंड विधानसभा सत्र के दूसरे दिन बजट पर परिचर्चा हुई। साथ ही बजट सत्र के दूसरे दिन प्रश्नकाल में कैबिनेट मंत्री प्रेमचंद अग्रवाल और चंदन रामदास विपक्ष के सवालों से घिरते नजर आए।

दोनों ही मंत्रियों ने विपक्ष के अनुपूरक सवालों के जवाब दिए, लेकिन विपक्ष इससे संतुष्ट नजर नहीं आया। विपक्षी सदस्यों का आरोप था कि मंत्री सवालों के जवाब देने के बजाय तर्क-वितर्क करके सदन का समय खराब कर रहे हैं। सीधे जवाब देने के बजाय बातों को घुमाया जा रहा है। वहीं आज सत्र के तीसरे दिन आज विपक्ष एक बार सरकार को घेर रहा  है। 

सदन में धरने पर बैठे विपक्षी नेता
जिला स्तरीय विकास प्राधिकरण खत्म करने को लेकर विपक्ष ने सदन में पहले हंगामा किया। अब कांग्रेस विधायक वेल में धरने पर बैठ गए हैं। विपक्ष ने कहा पूर्व में विधानसभा से जो कमेटी चंदन रामदास की अध्यक्षता में गठित हुई थी, उसकी रिपोर्ट कहां गई। कांग्रेस के हंगामे के चलते सदन की कार्यवाही कुछ देर रुकी। 
संसदीय कार्य मंत्री ने दिए विपक्ष के सवालों के जवाब

संसदीय कार्य मंत्री एवं शहरी विकास मंत्री प्रेम चंद अग्रवाल ने विपक्ष के सवालों का जवाब दिया। उन्होंने कहा कि जो पैसा प्राधिकरण कमाते हैं, उस क्षेत्र में अवस्थापना से जुड़े कामों में लगता है। 2016 के बाद जो क्षेत्र जिला स्तरीय विकास प्राधिकरण में शामिल हुए थे, वहां मानचित्र की कोई अनिवार्यता नहीं है। इसके बाद मंत्रिमंडलीय उप समिति की रिपोर्ट के आधार पर तमाम राहत दी गई। तय किया गया था कि अगर 2016 के बाद विकास प्राधिकरण में शामिल होने वाले नए क्षेत्रों को नक्शा पास कराने की स्वेच्छा से आजादी होगी, बाध्यता नहीं होगी। मंत्रिमंडल ने निर्णय लिया था कि 2016 से पूर्व के बने हुए विकास प्राधिकरण को छोड़कर नए जिला स्तरीय विकास प्राधिकरण को स्थगित किया गया था।

उप नेता प्रतिपक्ष ने कहा- जिला स्तरीय विकास प्राधिकरण बेतुका निर्णय

उप नेता प्रतिपक्ष भुवन कापड़ी ने कहा कि प्राधिकरण की जरूरत क्यों है? पालिका, नगर पंचायत से नक्शे पास होते थे। जब प्राधिकरण इतना पैसा वसूल रहा है तो उसके बदले जनता को क्या सुविधा दे रहे हैं। शहरी क्षेत्रों में शुल्क दो फीसदी और ग्रामीण क्षेत्रों में शुल्क पांच फीसदी। जिला स्तरीय विकास प्राधिकरण बेतुका निर्णय है। गरीबों से यह मात्र वसूली का जरिया है। उप नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि पिछली कमेटी की रिपोर्ट को पटल पर रक्खकर प्राधिकरण को समाप्त किया जाए। 

 प्राधिकरण से आम लोग परेशान: विपक्ष

ज्वालापुर कांग्रेस विधायक रवि बहादुर ने कहा कि जिला स्तरीय विकास प्राधिकरण लूट का अड्डा बन चुके हैं। हरिद्वार जिले में नजूल भूमि बहुत हैं। उन सबसे 25-25 हजार की रसीद काटी जा रही है। वहीं झबरेड़ा के कांग्रेस विधायक विरेन्द्र सिंह ने कहा कि प्राधिकरण में नक्शे की स्वीकृति की जो प्रक्रिया है, वह सुगम नहीं है। इसे सुगम किया जाए। प्राधिकरण की जो आय है उसे उसी क्षेत्र में विकास कार्यों पर खर्च किया जाए। उन्होंने कहा कि प्राधिकरण से आम लोगों को काफी कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों के साथ ही झबरेड़ा, मंगलौर, खटीमा आदि को जिला स्तरीय विकास प्राधिकरण से अलग किया जाए।

जिला स्तरीय विकास प्राधिकरण लूटपाट का जरिया बन गया: अनुपमा रावत

सदन में कांग्रेस विधायक अनुपमा रावत ने कहा कि हरिद्वार ग्रामीण में लोगों से नक्शा मांगा जा रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों में जिला स्तरीय विकास प्राधिकरण लूटपाट का जरिया बन गया है। लोगों में दहशत का माहौल है। ग्रामीण क्षेत्रों से प्राधिकरण को खत्म करना चाहिए। वहीं कांग्रेस विधायक सुमित ह्रदयेश ने कहा कि नजूल भूमि को फ्री होल्ड करने की प्रक्रिया होनी चाहिए। प्राधिकरण इन लोगों पर कार्रवाई करता है।

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisment -
video
play-sharp-fill

Most Popular

Recent Comments