Saturday, March 7, 2026
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17 साल में पकड़े गए 24 माओवादी तत्व, 11 हुए दोष मुक्त, 33 मुकदमे और 13 में लगी एफआर

उत्तराखंड में 17 साल के भीतर माओवादी गतिविधियों लिप्त 24  लोगों को गिरफ्तार किया गया। इनमें से 11 को विभिन्न न्यायालयों ने दोषमुक्त कर दिया। वहीं पुलिस इस दौरान एक तिहाई से ज्यादा मुकदमों में अंतिम रिपोर्ट (एफआर) भी कोर्ट को भेज चुकी है।

पुलिस मुख्यालय के अनुसार सौफुटिया वन क्षेत्र नैनीताल और हसपुर खत्ता क्षेत्र ऊधमसिंहनगर में 30 अगस्त 2004 को एक शस्त्र प्रशिक्षण शिविर पकड़ा गया था। आरोप था कि इस शिविर को नक्सली संगठन एमसीसीआई चला रही थी। इसके बाद 18 लोगों के खिलाफ नानकमत्ता और चार लोगों के खिलाफ बनबसा थाने में सरकार के खिलाफ युद्ध करने की तैयारी करने और देशद्रोह के आरोप में मुकदमा दर्ज कराया गया था।

प्रशिक्षण शिविर से हथियार और गोला बारूद भी बरामद हुआ
बनबसा थाने में ही विस्फोटक अधिनियम और आर्म्स एक्ट में भी दो मुकदमे दर्ज किए गए। इनमें भी वही चार लोग शामिल थे, जिनके खिलाफ देशद्रोह का मुकदमा दर्ज किया गया था। प्रशिक्षण शिविर से हथियार और गोला बारूद भी बरामद हुआ था। चोरगलिया, राजस्व चौकी शहरफाटक, अल्मोड़ा रुद्रपुर और तल्लीताल थाने में चार और मुकदमे दर्ज किए गए।

यही वह साल था जब माओवाद की शुरूआत बताते हुए पुलिस ने एक के बाद एक नौ मुकदमे दर्ज किए। इसके बाद वर्ष 2005 में पांच, 2006, 2007, 2008 व 2009 में एक-एक, 2014 में छह, 2015 व 2016 में दो-दो और वर्ष 2017 में पांच मुकदमे दर्ज हुए। बीते 17 वर्षों में 33 मुकदमे दर्ज किए गए। इनमें 13 मुकदमों में पुलिस एफआर लगा चुकी है। वहीं कुल गिरफ्तार लोगों में से 11 को विभिन्न न्यायालयों ने दोषमुक्त कर दिया है।

दो मुकदमों में हुई सजा
अभी तक दर्ज हुए मुकदमों में विभिन्न न्यायालयों ने दो मुकदमों में ही आरोपियों को सजा सुनाई है। माओवादी गतिविधियों में लिप्त रहने के आरोपियों और दोषियों में से कुल तीन जेल में बंद हैं। तीन मुकदमे विभिन्न न्यायालयों में विचाराधीन हैं। कुल पकड़े गए 24 आरोपियों में से तीन को प्रदेश के बाहर से पकड़ा गया था। इनमें से प्रशांत राही और हेम मिश्रा को महाराष्ट्र पुलिस ने व खीम सिंह बोरा को उत्तर प्रदेश पुलिस ने गिरफ्तार किया था। भास्कर पांडेय की गिरफ्तारी के बाद पुलिस उत्तराखंड से माओवाद का खात्मा मान रही है। हालांकि, अभी पांडेय के लिंक खंगाले जाने बाकी हैं।

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