Sunday, March 8, 2026
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सरकार को हाईकोर्ट की फटकार- संविदा डॉक्टरों की एक सप्ताह के भीतर हो नियुक्ति


देहरादून/ नैनीताल। संवाददाता। बीते शुक्रवार से हड़ताल पर गये निजी अस्पतालों के डाक्टरों के कारण सूबे के लोगों को उचित इलाज नहीं मिल पा रहा है। डाक्टरों की हड़ताल के कारण मरीजों को भारी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। आज इस मामले को गम्भीरता से लेते हुए नैनीताल हाईकोर्ट द्वारा सरकार को कड़ी फटकार लगाते हुए एक सप्ताह में संविदा पर डाक्टरों की नियुक्ति के निर्देश दिये गये है।

हाईकोर्ट की बैंच द्वारा सरकार को निर्देश दिये गये है कि मरीजों को उचित इलाज मुहैया कराना और उनके स्वास्थ्य की जिम्मेदारी राज्य सरकार की है ऐसी स्थिति में सरकार को डाक्टरों की वैकल्पिक व्यवस्था करनी चाहिए। हाईकोर्ट द्वारा सरकार को फटकार लगाते हुए कहा गया है कि सरकार एक सप्ताह के अन्दर संविदा पर डाक्टरों की नियुक्ति की व्यवस्था करे।

यहां यह उल्लेखनीय है कि क्लीनिकल एस्टेब्लिशमैंट एक्ट की जगह उत्तराखण्ड हेल्थ केयर एस्टेब्लिशमेंट एक्ट की मांग को लेकर निजी अस्पतालों के डाक्टरों द्वारा बीते शुक्रवार से हड़ताल की जा रही है। निजी अस्पतालों में न तो मरीजों को भर्ती किया जा रहा है और न ही ओपीडी खुली हुई है सिर्फ एमरजेंसी सेवायें ही जारी है निजी अस्पतालों के डाक्टर इस जिद पर अड़े है कि सरकार जब तक उनकी मांगों को नहीं मानेगी वह काम शुरू नहीं करेगें। पांच दिनों से जारी इस हड़ताल के कारण सूबे के मरीजों को भारी दिक्कतें हो रही है। सरकारी अस्पतालों पर भी मरीजों का बोझ बढ़ गया है। ओपीडी में पहले से अधिक मरीज पहुंच रहे है और लोगो को इलाज नहीं मिल पर रहा है।

यहां यह भी उल्लेखनीय है कि निजी अस्पतालों में काम न होने से जांच का काम भी प्रभावित हुआ है। सरकार द्वारा सख्ती बरतने का निजी डाक्टरों पर कोई प्रभाव नहीं पड़ा है और वह कह रहे है कि सरकार ने जो वायदा किया था उसे पूरा किया जाये। आईएमए के प्रांतीय अध्यक्ष डा. वी.एस.जज का कहना है कि सरकार नया एक्ट क्यों नहीं ला रही है जब तक नया एक्ट नहीं लाया जायेगा तब तक वह हड़ताल वापस नही लेगें। आज विधानसभा में डाक्टरों की हड़ताल का यह मुद्दा उठाये जाने की उम्मीद है तथा मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत जिनके पास स्वास्थ्य विभाग की भी जिम्मेदारी है, इस मुद्दे पर अपना क्या स्पष्टीकरण देते है समय आने पर ही पता चल सकेगा। महत्वपूर्ण बात यह है कि जिन निजी अस्पतालों द्वारा 60 फीसदी से अधिक मरीजों का भार है उनकी हड़ताल से मरीज कब तक परेशान रहेगें और सरकार पांच दिन बाद भी इस मुद्दे पर उदासीन क्यों बनी हुई है।

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