Sunday, March 8, 2026
Homeअपराधकिशोरी के साथ दुराचार करने वाला पहुंचा सलाखों के पीछे

किशोरी के साथ दुराचार करने वाला पहुंचा सलाखों के पीछे

देहरादून। संवाददाता। भले ही पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए नौ साल की मासूम को अपनी हवस का शिकार बनाने वाले आरोपी को गिरफ्तार कर लिया हो, लेकिन सूबे में लगातार बढ़ रहे दलित अत्याचारों की घटनाओं को लेकर जहां समाज में भारी आक्रोश पनप रहा है वहीं अब सत्ता में बैठे लोगों के लिए इस तरह की घटनाएं परेशानियों का कारण बनती जा रही है।

बीते वीरवार को दोपहर के समय टिहरी के नैनवाल तहसील के एक गांव में पांचवी कक्षा में पढ़ने वाली एक दलित बालिका के साथ गांव के ही पड़ोसी दुकानदार द्वारा किये गये दुराचार की घटना से क्षेत्र में भारी आक्रोश बना हुआ है। थाना कैम्पटी पुलिस ने बीते कल आरोपी दुकानदार विपिन कुमार को कल ही गिरफ्तार कर लिया था जिसे आज कोर्ट में पेश किया गया। जहां से जहां से उसे न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया है। वहीं पीड़ित बच्ची व उसके परिजनों को भी पुलिस के पहरे में गांव पहुंचा दिया गया। तथा क्षेत्र में पुलिस की निगरानी जारी है जिससे किसी तरह की अप्रिय घटना को टाला जा सके। पुलिस पीड़ित परिवार से किसी को मिलने नहीं दे रही है लेकिन इस घटना को लेकर दलित समाज में भय और गुस्से का माहौल है।

क्षेत्र में दलित उत्पीड़न की यह कोई पहली घटना नहीं है। अभी विगत दिनों इसी क्षेत्र में एक दलित युवक जितेन्द्र की दबंगों ने पीट पीट कर हत्या कर दी थी। घटना को पुलिस ने कई दिनों तक दबाये रखा लेकिन जब युवक ने दम तोड़ दिया और आंदोलन भड़का तो पुलिस को आरोपियों की गिरफ्तारी करनी पड़ी। जिसे लेकर प्रशासन की भारी किरकिरी हुई। दोबारा ऐसा न हो इसलिए पुलिस ने इस मामले में गम्भीरता तो दिखायी लेकिन सवाल यह है कि दलित उत्पीड़न की इन घटनाओं को कब रोका जायेगा। शासन प्रशासन कब तक सोता रहेगा।

सूबे के नेता केन्द्र सरकार की ताजपोशी में व्यस्त थे लेकिन अब तक सरकार की ओर से इस गम्भीर मामले में एक शब्द भी नहीं बोला गया है। जबकि राजनीतिक दलों व सामाजिक संगठनों में इस मामले को लेकर भारी आक्रोश है जैसा की बताया जा रहा है कि इस परिवार की एक लड़की की चार साल पहले भी दबंगों ने सामुहिक बलात्कार के बाद हत्या कर दी थी और इस पर कोई कार्यवाही नहीं हुई थी इसके बाद एक और दलित युवक की हत्या और एक मासूम के साथ दुष्कर्म की घटनाए अत्यंत चिंतनीय है। क्षेत्र के पीड़ित दलित परिवार गांव छोड़ने पर विवश है। लेकिन सरकार का मौन और प्रशासन की कार्यवाही सवालों के घेरे में है। जिसके कारण इस तरह की घटनाओं को बढ़ावा मिल रहा है।

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