Saturday, March 7, 2026
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IMA POP 2021 : उत्तराखंड के सपूतों ने दिखाया दमखम, स्वर्ण और रजत पदक किए अपने नाम

आईएमए की पासिंग आउट परेड में उत्तराखंड के सपूतों ने जमकर दमखम दिखाया। अकादमी में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए मिलने वाले दो अहम पुरस्कार स्वर्ण और रजत पदक उत्तराखंड के नाम रहे।वहीं देशभर के 341 कैडेटों में से 37 कैडेटों के साथ उत्तराखंड इस बार तीसरे नंबर पर रहा। आईएमए से पासआउट होने वाला हर 12वां अधिकारी उत्तराखंड से है। वहीं भारतीय सेना का हर पाचवां जवान भी इसी वीरभूमि में जन्मा है।
ध्याडी गांव अल्मोड़ा के दीपक सिंह को मिला गोल्ड मेडल 
स्वर्ण पदक से नवाजे गए दीपक सिंह ध्याड़ी गांव अल्मोड़ा के रहने वाले हैं। उनके पिता त्रिलोक सिंह फौज से हवलदार पद पर रिटायर हुए हैं। शुरुआत से ही सैन्य परिवेश में रहे दीपक की इच्छा थी कि वह सैन्य अफसर बनें।उनकी प्रारंभिक शिक्षा राष्ट्रीय मिलिट्री स्कूल बेंगलुरु से हुई। अपनी लगन व परिश्रम से उन्होंने एनडीए की प्रवेश परीक्षा में सफलता हासिल की। अब न केवल उनका सपना पूरा हो गया है, बल्कि आईएमए में रहकर उन्होंने अपनी काबिलियत भी साबित की।

अल्मोड़ा के दक्ष ने दिखाई दक्षता, हासिल किया रजत पदक

स्वर्ण पदम के साथ ही रजत पदक (टीजी) हासिल करने वाले दक्ष कुमार पंत भी उत्तराखंड से हैं। उनके पिता हेमंत पंत सेना में ब्रिगेडियर के पद पर तैनात हैं। वह फिलहाल पुणे में तैनात हैं। पंत परिवार मूल रूप से सर्प गांव अल्मोड़ा का रहने वाला है। दक्ष ने एसआरएम विश्वविद्यालय चैन्नई से बीटेक किया है। वह चाहते तो किसी निजी कंपनी में नौकरी कर सकते थे। लेकिन फौजी वर्दी की ललक ने उनकी जिंदगी का रुख मोड़ दिया।
सीकर राजस्थान के मुकेश को मिला स्वॉर्ड ऑफ ऑनर
सैन्य परिवार से ताल्लुक रखने वाले सीकर राजस्थान के मुकेश को आईएमए का प्रतिष्ठित अवार्ड स्वॉर्ड ऑफ ऑनर मिला। उनके पिता मनोहर लाल भी फौज में थे। वह बतौर नायक पद से सेवानिवृत्त हुए हैं। उनका बड़ा भाई मनीश एयरफोर्स में कार्पोरल है। जबकि छोटा भाई महेश कुमार सेना में कैप्टन है। अब मुकेश भी सेना में अफसर बन गए हैं।

किसान के बेटे ने पाया मुकाम, मिला कांस्य पदक 
मोगा पंजाब के रहने वाले लवनीत ने कांस्य पदक हासिल एक मुकाम हासिल किया है। लवनीत एक सामान्य परिवार से ताल्लुक रखते हैं। उनके पिता रूपेंद्र सिंह कृषक और मां परवीन कौर ग्रहणी हैं। लवनीत की बचपन से ही फौज को ज्वाइन करने की इच्छा थी। आज उनका सपना साकार हो चुका है। वह एक अच्छा सैन्य अफसर बन देश और अपने प्रदेश का नाम रोशन करेंगे।

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