Saturday, March 7, 2026
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अब तक छह शव बरामद, तीन दिन बाद भी 12 लोग लापता, खोजबीन जारी

देहरादून : शुक्रवार मध्यरात्रि को देहरादून की बांदल घाटी में आई आपदा ने करीब आठ किलोमीटर क्षेत्र में भारी तबाही मचाई है। आपदा के तीन दिन बाद भी जीवन पटरी पर नहीं लौटा है। अपनों को खोने वाले गमगीन परिजनों के घरों में चूल्हे नहीं जल रहे हैं।

पका हुआ भोजन व कच्चा राशन कराया जा रहा मुहैया

क्षेत्र के इन परिवारों के लिए जिला प्रशासन, एनडीआरएफ व एसडीआरएफ पका हुआ भोजन व कच्चा राशन मुहैया करा रही है। सोमवार को मालदेवता के लालपुल पर पीपीसीएल-सरखेत, घंतू की सेर, सरकी गांव के प्रभावित परिवारों को कच्चा राशन, एलपीजी गैस चूल्हा, पीने का पानी आदि बांटा गया।

लापता पांच लोगों की तलाश कर रही एनडीआरएफ व एसडीआरएफ
आपदा सेसर्वाधिक प्रभावित घंतू की सेर गांव में तीन दिन बाद सोमवार सुबह आठ बजे जेसीबी मशीन व पोकलैंड पहुंचीं। गांव में एक घर अभी भी टनों मलबे की नीचे दबा हुआ है। यहां तीन दिन से एनडीआरएफ व एसडीआरएफ की टीमें लापता पांच लोगों की तलाश कर रही है।

मशीनों से खोदाई के काम में आई तेजी
अब मशीनों से खोदाई के काम में तेजी आई है। यहां एक भवन के मलबे में रमेश सिंह के 16 वर्ष के बेटा विशाल व चचेरा भाई जगमोहन के दबे होने की आशंका है। यह दोनों लोग शुक्रवार रात्रि को गांव के पास बादल फटने से मची तबाही के बाद से गायब हैं।

परिवार का तीन दिन से रो-रोकर बुरा हाल
जगमोहन की पत्री 29 वर्ष की सपना ने संपर्क करने पर कहा कि उनको अभी भी आशा है कि पति जीवित होंगे। परिवार का तीन दिन से रो-रोकर बुरा हाल है। सरखेत गांव तक आज शाम विद्युत आपूर्ति बहाल होने की उम्मीद है।

बांदल क्षेत्र में सोमवार को भी हल्की वर्षा हुई, जिससे राहत कार्यों में बाधा उत्पन्न हो सकती है। हालांकि हल्की वर्षा दोपहर 12 बजे से ही शुरू हुई। सरखेत के प्रधान संजय कुमार ने कहा कि पांच गांवों में पका हुआ व कच्चा राशन बांटने में मदद की जा रही हैं।

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