Sunday, March 8, 2026
Homeराज्यउत्तराखण्डउत्तराखंड के मंत्री के आग्रह पर इसरो ने हटाई भूधंसाव की तस्वीरें,...

उत्तराखंड के मंत्री के आग्रह पर इसरो ने हटाई भूधंसाव की तस्वीरें, कहा- पैदा हो रहा था भय का माहौल

देहरादून: उत्तराखंड के मंत्री डॉ. धन सिंह रावत के आग्रह पर भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संस्थान (इसरो) ने जोशीमठ भू-धंसाव की सेटेलाइट तस्वीरें हटाईं। मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने यह जानकारी दी। बताया कि उनके द्वारा इसरो के निदेशक से इस मामले को लेकर आग्रह किया गया था।

मंत्री के द्वारा कहा गया था कि इन तस्‍वीरों में राज्‍य में भय का माहौल पैदा हो रहा है। जिसके बाद इसरो द्वारा उक्‍त तस्‍वीरें वेबसाइट से हटवा दी गई। बता दे कि स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री डॉ. धन सिंह रावत चमोली जिले के प्रभारी मंत्री भी हैं और वर्तमान में आपदा की स्थिति में वह जोशीमठ में ही कैंप कर रहे हैं।

सेटेलाइट चित्रों में दर्शाई गई जमीन धंसने की ताजा स्थिति
चमोली के जोशीमठ में भूधंसाव को लेकर निरंतर चौंकाने वाली जानकारी सामने आ रही है। कुछ दिन पहले वाडिया हिमालय भूविज्ञान संस्थान ने सेटेलाइट अध्ययन में बताया था कि यहां जमीन खिसकने/धंसने की सालाना दर करीब 85 मिलीमीटर है।

इसके बाद इसरो के देहरादून स्थित भारतीय सुदूर संवेदन संस्थान (आइआइआरएस) ने भूधंसाव की सालाना दर 65 से 87 मिलीमीटर बताई थी। अब इसरो के हैदराबाद स्थित नेशनल रिमोट सेंसिंग सेंटर (एनआरएससी) ने सेटेलाइट चित्र जारी कर जोशीमठ क्षेत्र में 12 दिन में ही 5.4 सेंटीमीटर (54 मिलीमीटर) के धंसाव की चौकाने वाली जानकारी दी है। यह जानकारी इसरो के हवाले से प्रमुख समाचार एजेंसी पीटीआइ ने जारी की है।

पीटीआइ के मुताबिक इसरो के नेशनल रिमोट सेंसिंग सेंटर ने दो अंतराल के सेटेलाइट चित्र जारी किए हैं। इनमें अप्रैल से नवंबर 2022 के मध्य किए गए सेटेलाइट .अध्ययन में कहा गया है कि सात माह में जोशीमठ की जमीन में 8.9 सेंटीमीटर (89 मिलीमीटर) का धंसाव पाया गया।

इसके बाद 27 दिसंबर 2022 से आठ जनवरी 2023 के बीच 12 दिन के सेटेलाइट चित्र जारी किए गए हैं। इस अंतराल में भूधंसाव कई दर पहले से कहीं अधिक 5.4 सेंटीमीटर (54 मिलीमीटर) पाई गई है। हालांकि, यह धंसाव जोशीमठ शहर के मध्य क्षेत्र तक सीमित पाया गया।

इसके साथ ही धंसाव का ऊपरी क्षेत्र जोशीमठ-औली रोड पर 2180 मीटर की ऊंचाई पर दर्शाया गया है। भूधंसाव के सेटेलाइट चित्रों में आर्मी हैलीपैड और नरसिंह मंदिर के भूक्षेत्रों को प्रमुखता से दर्शाया गया है। यह भूभाग जोशीमठ शहर के मध्य क्षेत्र में ही स्थित हैं।

20 साल में बदल सकता है जोशीमठ का नक्शा
यदि जोशीमठ में भूधंसाव की दर 12 दिन के अंतराल में 54 मिलीमीटर ही रही तो आने वाले 20 साल में क्षेत्र का नक्शा ही बदल सकता है। क्योंकि, यदि इसी दर को आधार मानें तो माहभर में ही 135 मिलीमीटर का धंसाव होगा।

सालभर में यह आंकड़ा 1620 मिलीमीटर होगा और 20 साल में 32 हजार 400 मिलीमीटर यानी 3240 सेंटीमीटर होगा। मीटर में यह आंकड़ा 32.4 मीटर पहुंच जाएगा।

हालांकि, यदि विज्ञानियों की संस्तुतियों के आधार पर काम किया जाए तो भूधंसाव की रफ्तार को थामा जा सकता है। जिसके तहत क्षेत्र के ड्रेनेज सिस्टम को ठीक करना होगा, निर्माण को नियंत्रित व नियोजित करना होगा और अलकनंदा नदी की तरफ से हो रहे कटाव को रोकने के उपाय करने होंगे।

राज्य में कार्यरत एजेंसियों को इसरो के चित्रों की जानकारी नहीं
इसरो के नेशनल रिमोट सेंसिंग सेंटर की तरफ से जारी भूधंसाव के ताजा सेटेलाइट चित्रों की जानकारी ही नहीं है। यहां तक कि देहरादून में स्थित इसरो के ही भारतीय सुदूर संवेदन संस्थान ने भी ऐसे चित्र जारी किए जाने पर अनभिज्ञता जताई।

वहीं, राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण व उत्तराखंड अंतरिक्ष उपयोग केंद्र ने भी कहा कि उनके जोशीमठ के सेटेलाइट चित्र साझा नहीं किए गए। साथ ही इस तरह की जानकारी रिमोट सेंसिंग सेंटर हैदराबाद व इसरो की वेबसाइट पर भी नही पाए गए। इसरो के जनसंपर्क विभाग ने भी आधिकारिक रूप से ऐसे किसी चित्र को जारी किए जाने की पुष्टि नहीं की।

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisment -
video
play-sharp-fill

Most Popular

Recent Comments