Saturday, March 7, 2026
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उत्तराखंड परिवहन विभाग के प्रवर्तन कर्मियों की बदलेगी वर्दी, पदनाम और रैंक में होगा एकरूपता

देहरादून। उत्तराखंड परिवहन विभाग में कार्यरत आरटीओ और उनके मातहत प्रवर्तन अधिकारियों व कर्मचारियों की वर्दी जल्द ही बदली हुई नजर आएगी। पहली बार परिवहन विभाग के प्रवर्तन (इन्फोर्समेंट) से जुड़े अधिकारियों और कर्मचारियों की यूनिफॉर्म को लेकर नियमों का ड्राफ्ट तैयार किया गया है। इसे शीघ्र ही कैबिनेट में लाने की तैयारी है।

सचिव परिवहन बृजेश कुमार संत द्वारा उत्तराखंड मोटर वाहन (संशोधन) नियम, 2025 का ड्राफ्ट जारी किया गया है, जिस पर 15 जनवरी तक सुझाव और आपत्तियां आमंत्रित की गई हैं। ड्राफ्ट के तहत उत्तराखंड मोटर वाहन नियमावली, 2011 के नियम 229 में संशोधन प्रस्तावित है।

प्रस्तावित संशोधन के अनुसार परिवहन विभाग के प्रवर्तन से जुड़े विभिन्न पदों के नाम, उनकी रैंक तथा ग्रीष्मकालीन और शीतकालीन वर्दी को स्पष्ट रूप से परिभाषित किया गया है। नियम लागू होने के बाद प्रवर्तन कर्मियों की पहचान, अनुशासन और रैंक में एकरूपता आएगी।

वर्दी का नया स्वरूप

नई वर्दी में खाकी शर्ट और पुलिस पैटर्न की पैंट होगी। टोपी (कैप) पर उत्तराखंड परिवहन का मोनोग्राम अनिवार्य रहेगा। इसके साथ कंधे का बैज, शोल्डर स्ट्रैप, रैंक चिह्न (स्टार व वी-शेप स्ट्रैप), नाम पट्टिका और सीटी भी वर्दी का हिस्सा होंगी।

रैंक के अनुसार काले या भूरे रंग की क्रॉस बेल्ट, जूते और मोजे निर्धारित किए गए हैं। वरिष्ठ पदों के लिए पीले धातु के स्टार, अशोक चिह्न और विशेष बैज का भी प्रावधान किया गया है।

पदनामों में बदलाव

ड्राफ्ट के अनुसार कई पदनामों में भी बदलाव प्रस्तावित हैं—

  • सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी (प्रवर्तन) का नाम बदलकर संभागीय परिवहन अधिकारी (प्रवर्तन) किया जाएगा।

  • प्रवर्तन पर्यवेक्षक के स्थान पर ट्रांसपोर्ट असिस्टेंट इंस्पेक्टर पदनाम होगा।

  • प्रवर्तन सिपाही अब परिवहन सिपाही कहलाएंगे।

  • इसके अलावा ट्रांसपोर्ट सब इंस्पेक्टर जैसे नए पद को भी नियमावली में शामिल किया गया है।

मौसम के अनुसार अलग वर्दी

गर्मियों में हल्की खाकी वर्दी निर्धारित की गई है, जबकि सर्दियों में फुल स्लीव एंगोला शर्ट, ऊनी मोजे और खाकी जैकेट पहननी होगी। हालांकि टोपी, बैज, क्रॉस बेल्ट, सीटी और नाम पट्टिका दोनों मौसमों में समान रहेंगी।

परिवहन विभाग का मानना है कि इस बदलाव से प्रवर्तन व्यवस्था अधिक पेशेवर, अनुशासित और प्रभावी बनेगी।

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