देहरादून। जनजातीय समुदायों के समावेशी, सतत और तकनीक आधारित विकास को बढ़ावा देने के उद्देश्य से शनिवार को देहरादून में एक दिवसीय उच्चस्तरीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। “जनजाति गरिमा सम्मान-2026” के अंतर्गत आयोजित इस कार्यशाला का विषय “Technology Based Sustainable Tribal Development” रहा।
कार्यशाला का आयोजन राज्य जनजातीय शोध संस्थान एवं संग्रहालय (TRI) देहरादून द्वारा जनजातीय कार्य मंत्रालय, भारत सरकार के सहयोग से किया गया। कार्यक्रम में जनजातीय कल्याण विभाग के अधिकारियों, नीति निर्माताओं, तकनीकी विशेषज्ञों, शोधकर्ताओं और विभिन्न संस्थानों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।
कार्यशाला में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित तकनीकों की संभावनाओं, उपयोगिता और जनजातीय विकास में उनके प्रभावी उपयोग पर विस्तार से चर्चा की गई। विशेषज्ञों ने बताया कि AI केवल तकनीकी उन्नयन का माध्यम नहीं, बल्कि डेटा आधारित निर्णय, संसाधनों के बेहतर उपयोग और प्रशासनिक कार्यप्रणाली को अधिक प्रभावी बनानेका सशक्त साधन बनकर उभर रहा है।
इस दौरान विभिन्न आधुनिक AI प्लेटफॉर्म्स का प्रदर्शन भी किया गया। विशेषज्ञों ने बताया कि इन तकनीकों का उपयोग पत्राचार, रिपोर्ट तैयार करने, डेटा विश्लेषण, दस्तावेजों के डिजिटलीकरण, प्रस्तुतीकरण और प्रशासनिक कार्यों की दक्षता बढ़ाने में किया जा सकता है।
कार्यक्रम में जनजातीय कल्याण विभाग के निदेशक संजय सिंह टोलिया ने कहा कि विभाग लगातार डिजिटल प्रणालियों और ई-ऑफिस जैसे प्लेटफॉर्म्स को बढ़ावा दे रहा है, जिससे प्रशासनिक कार्य अधिक पारदर्शी और प्रभावी बन रहे हैं।
वहीं अपर निदेशक योगेंद्र रावत ने कहा कि जनजातीय समुदायों की सामाजिक और भौगोलिक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप AI आधारित समाधान विकसित करना जरूरी है।
कार्यक्रम में राज्य समन्वयक राजीव सोलंकी ने कहा कि AI शिक्षा, स्वास्थ्य, कौशल विकास और आजीविका के क्षेत्र में नए अवसर पैदा कर सकता है और इसके माध्यम से जनजातीय समुदायों के जीवन स्तर में सकारात्मक बदलाव लाया जा सकता है।
कार्यशाला में विशेषज्ञों ने जनजातीय विकास योजनाओं में AI आधारित समाधान और डेटा संचालित निर्णय प्रणाली को शामिल करने पर विशेष जोर दिया। साथ ही भविष्य में जनजातीय क्षेत्रों की स्थानीय जरूरतों के अनुरूप तकनीक आधारित विकास मॉडल तैयार करने की आवश्यकता भी बताई गई।

