देहरादून/कानपुर: देहरादून स्थित इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ रिमोट सेंसिंग (आईआईआरएस) के अनुसंधान प्रशिक्षु और आईआईटी पटना के छात्र ऋषभ राठौर ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शानदार उपलब्धि हासिल कर देश का नाम रोशन किया है। ऋषभ राठौर और उनकी वैश्विक टीम एनई-एआर (नेचुरलिस्ट्स एक्सप्लोरर – ऑगमेंटेड रियलिटी) ने नासा इंटरनेशनल स्पेस ऐप्स चैलेंज-2025 में उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए कई प्रतिष्ठित सम्मान अपने नाम किए।
कानपुर के हूलागंज निवासी ऋषभ राठौर को उनकी टीम के साथ नासा ग्लोबल नोमिनी-2025 का सम्मान मिला। इसके साथ ही टीम को गैलेक्टिक प्रॉब्लम सॉल्वर अवार्ड-2025 से भी नवाजा गया। इतना ही नहीं, यूनिवर्सिटी ऑफ जॉर्जिया स्पेस ऐप्स प्रतियोगिता में भी उनकी टीम ने प्रथम स्थान हासिल किया। दुनियाभर के हजारों वैज्ञानिकों, इंजीनियरों और छात्रों के बीच भारतीय शोधार्थी की यह सफलता विज्ञान और तकनीक के क्षेत्र में देश की बढ़ती क्षमता को दर्शाती है। ऋषभ के पिता राजू राठौर कानपुर में व्यवसायी हैं।
अभिनव परियोजना से मिली वैश्विक पहचान
टीम एनई-एआर की पुरस्कार विजेता परियोजना एक ऑगमेंटेड रियलिटी आधारित पर्यावरण अन्वेषण मंच है। यह प्लेटफॉर्म पृथ्वी के पर्यावरण और जलवायु तंत्र को वास्तविक समय में देखने, समझने और अनुभव करने की सुविधा देता है। इस परियोजना में पृथ्वी अवलोकन डेटा, दूरसंवेदी तकनीक, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और ऑगमेंटेड रियलिटी जैसी आधुनिक तकनीकों का उपयोग किया गया है। इसका उद्देश्य आम लोगों और शोधकर्ताओं को पर्यावरण और जलवायु परिवर्तन को बेहतर ढंग से समझने में मदद देना है।
दुनिया का सबसे बड़ा नवाचार मंच
नासा द्वारा आयोजित स्पेस ऐप्स चैलेंज को दुनिया के सबसे बड़े वैज्ञानिक और तकनीकी नवाचार कार्यक्रमों में गिना जाता है। इस वर्ष इस पहल में 3.7 लाख से अधिक प्रतिभागियों ने भाग लिया, जबकि 185 से अधिक देशों और क्षेत्रों में इसके स्थानीय आयोजन हुए। इस कार्यक्रम को यूरोपियन स्पेस एजेंसी, जापान एयरोस्पेस एक्सप्लोरेशन एजेंसी और कैनेडियन स्पेस एजेंसी सहित कई अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष एजेंसियों का सहयोग प्राप्त है।

