देहरादून। उत्तराखंड में आगामी चारधाम यात्रा शुरू होने में अब 50 दिन से भी कम समय बचा है। ऐसे में शासन और प्रशासन स्तर पर तैयारियां तेजी से चल रही हैं। यात्रा मार्ग पर सुरक्षा और यातायात व्यवस्था को सुचारु रखने के लिए करीब 6500 पुलिसकर्मी तैनात किए जाएंगे। पूरे यात्रा मार्ग को 10-10 किलोमीटर के सेक्टर में बांटकर निगरानी की जाएगी।
गढ़वाल मंडलायुक्त विनय शंकर पांडे और आईजी गढ़वाल राजीव स्वरूप ने यात्रा मार्ग का निरीक्षण कर व्यवस्थाओं का जायजा लिया। निरीक्षण के आधार पर आगे की कार्ययोजना तैयार की जा रही है। आईजी गढ़वाल ने बताया कि अप्रैल में शुरू होने वाली यात्रा के लिए तैयारियां शुरू कर दी गई हैं और इस संबंध में गढ़वाल कमिश्नर की अध्यक्षता में बैठक भी आयोजित की गई, जिसमें सभी विभागों की जिम्मेदारियां तय कर दी गई हैं।
सीसीटीवी और एनपीआर कैमरों से निगरानी
चारधाम यात्रा को सुरक्षित और व्यवस्थित बनाने के लिए पुलिस व्यापक योजना पर काम कर रही है। पिछले वर्षों के अनुभवों को ध्यान में रखते हुए यात्रा मार्ग के हर महत्वपूर्ण बिंदु पर नजर रखी जाएगी। सभी धामों में सीसीटीवी और एनपीआर कैमरे लगाए गए हैं, जिससे सुरक्षा व्यवस्था मजबूत होने के साथ ही भीड़ का सही आकलन किया जा सकेगा।
गढ़वाल कमिश्नर ने बताया कि 31 मार्च तक सभी व्यवस्थाएं पूरी करने की समयसीमा तय की गई है और सभी विभागों को उसी अनुसार कार्य करने के निर्देश दिए गए हैं।
मोबाइल पर मिलेगा अलर्ट
चारधाम यात्रा के लिए पंजीकरण कराने वाले श्रद्धालुओं को उनके मोबाइल नंबर पर रूट डायवर्जन, ट्रैफिक जाम और खराब मौसम की जानकारी संदेश के माध्यम से दी जाएगी। आईजी राजीव स्वरूप ने बताया कि पिछले वर्ष भी यह व्यवस्था कारगर साबित हुई थी, इसलिए इस बार भी इसे लागू किया जा रहा है।
भीड़ नियंत्रण के लिए अलग योजना
आगामी यात्रा सीजन में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के आने की संभावना को देखते हुए भीड़ नियंत्रण के लिए अलग कार्ययोजना बनाई जा रही है। हर जिले के लिए अलग प्लान तैयार किया जाएगा, जिस पर जिला पुलिस काम करेगी।
यदि पहाड़ी क्षेत्रों में भीड़ अधिक हो जाती है तो बाहर से आने वाले यात्रियों को हरिद्वार, देहरादून और ऋषिकेश जैसे स्थानों पर रोका जाएगा, जहां उनके ठहरने और भोजन की व्यवस्था की जाएगी। इसके लिए एक विस्तृत एसओपी भी तैयार की गई है। धामों की क्षमता और यात्रियों की संख्या के वैज्ञानिक अध्ययन के आधार पर ही यात्रा का संचालन और पंजीकरण किया जाएगा। जरूरत पड़ने पर यात्रा को रोकने या डायवर्ट करने की भी योजना बनाई गई है।
भूस्खलन क्षेत्रों में विशेष निगरानी
चारधाम यात्रा मार्ग पर संभावित भूस्खलन क्षेत्रों की सूची भी तैयार की गई है। पिछले वर्ष 58 भूस्खलन क्षेत्र चिन्हित किए गए थे और हाल की आपदाओं के बाद कुछ नए संवेदनशील क्षेत्र भी सामने आए हैं। इन सभी स्थानों पर पुलिसकर्मियों की तैनाती की जाएगी और जेसीबी मशीनें भी उपलब्ध रहेंगी। इसके लिए पीडब्ल्यूडी, एनएच और बीआरओ को जिम्मेदारी सौंपी गई है।
काम की बातें
-प्रमुख स्थलों पर क्यूआर कोड लगाए जाएंगे, जिन्हें स्कैन कर यात्री मोबाइल पर ही स्थान की जानकारी प्राप्त कर सकेंगे।
-ट्रैफिक जाम या आपातकालीन स्थिति में यात्रियों को मोबाइल पर अलर्ट भेजा जाएगा।
-यात्रा के दौरान पर्यटकों के वाहनों के लिए ग्रीन कार्ड अनिवार्य होगा।
-प्रशासन का मानना है कि इन व्यवस्थाओं से चारधाम यात्रा को सुरक्षित, सुव्यवस्थित और श्रद्धालुओं के लिए अधिक सुविधाजनक बनाया जा सकेगा।

