Sunday, March 8, 2026
Homeराज्यउत्तराखण्डडीजीपी अशोक कुमार ने पुलिस अस्पतालों में व्यवस्था बनाने के दिए निर्देश

डीजीपी अशोक कुमार ने पुलिस अस्पतालों में व्यवस्था बनाने के दिए निर्देश

देहरादून। पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) अशोक कुमार ने प्रदेश के सभी वरिष्ठ पुलिस अधीक्षकों, पुलिस अधीक्षकों और वाहिनियों के कमांडेंट को पुलिस अस्पतालों में कोरोना संक्रमण के उपचार के लिए व्यवस्था बनाने के निर्देश दिए हैं। वीडियो कांफ्रेंस के माध्यम से पुलिस अधिकारियों के साथ बैठक कर डीजीपी ने कहा कि कोविड के उपचार के लिए जनपदों में स्थापित पुलिस अस्पतालों में इंतजाम पूरे कर लिए जाएं। संक्रमित पुलिसकर्मियों को ऑक्सीजन की आपूर्ति के लिए बड़े जिले 10 सिलिंडर व छोटे जिले पांच सिलिंडर अपने पास रखें।

सभी जिला प्रभारियों को डीजीपी ने कोविड के चलते हर सरकारी अस्पताल में दो से चार पुलिसकर्मियों को ड्यूटी पर तैनात रखने का निर्देश दिया। उन्होंने यह भी कहा कि हर पुलिसकर्मी को फेस मास्क और फेस शील्ड उपलब्ध कराई जाए। जिन पुलिसकर्मियों को कोरोना रोधी वैक्सीन की दूसरी डोज नहीं लगी है, वह जल्द से जल्द डोज लगवाएं। बताया कि जिन जिलों में स्मार्ट कंट्रोल रूम नहीं है, वहां स्मार्ट कंट्रोल रूम बनाने का लक्ष्य इस वर्ष पूरा किया जाएगा। प्रदेश के सभी थानों में नए कंप्यूटर मुहैया कराए जाएंगे। अब थाने के रिसेप्शन पर भी कंप्यूटर होगा। वहीं, पीएसी जवानों के लिए बस की व्यवस्था की जा रही है ताकि उन्हें मूवमेंट के दौरान ट्रक में यात्रा न करनी पड़े।

शारीरिक दक्षता परीक्षा छह मई को

बैठक में डीजीपी ने बताया कि उप निरीक्षक और मुख्य आरक्षी रैंकर भर्ती में चयनित जो कर्मी किन्हीं कारणों से शारीरिक दक्षता परीक्षा नहीं दे पाए, वह अब छह मई को यह परीक्षा दे सकेंगे। उन्होंने बताया कि इस वर्ष के अंत तक पौड़ी, अल्मोड़ा, चमोली, उत्तरकाशी, पिथौरागढ़ की पुलिस लाइन और आइआरबी द्वितीय का उच्चीकरण पूरा हो जाएगा। साथ ही राज्य के जर्जर थानों व चौकियों के भवनों का नवीनीकरण और सुधारीकरण भी किया जाएगा।

विवेचना अधिकारियों को टैबलेट

बैठक में डीजीपी ने बताया कि विवेचना को गति देने के लिए विवेचना अधिकारियों को टैबलेट दिए जाने की योजना है, जिससे वह अपनी केस डायरी का कार्य घटनास्थल से ही शुरू कर सकें। उन्होंने बताया कि न्यायालयों में केस से संबंधित दस्तावेज ऑनलाइन जमा किए जाने की प्रक्रिया चल रही है। इसके चलते वर्तमान में जांच अधिकारी अपनी केस डायरी सीसीटीएनएस के माध्यम से लिखते हैं, जिसमें काफी समय लगता है।

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