देहरादून: मुख्यमंत्री के मार्गदर्शन और प्रेरणा से देहरादून जिला प्रशासन शहर के प्रमुख चौराहों को केवल यातायात मार्ग नहीं, बल्कि सुरक्षित, भव्य और सांस्कृतिक शो-केस के रूप में विकसित कर रहा है। जिलाधिकारी सविन बंसल के निर्देशन में तैयार किए गए कुठालगेट और साई मंदिर तिराहे अब गढ़वाल–कुमाऊँ की सांस्कृतिक, ऐतिहासिक और पौराणिक धरोहरों का जीवंत प्रदर्शन बनकर उभरे हैं।
परियोजनाओं का डिजाइन, कार्यान्वयन और संकल्पना जिला प्रशासन द्वारा की गई, जबकि वित्त पोषण स्मार्ट सिटी लिमिटेड द्वारा उपलब्ध कराया गया। कुठालगेट पर 135 लाख रुपये और साई मंदिर तिराहे पर 85 लाख रुपये की लागत से सौंदर्यीकरण और आधुनिक यातायात व्यवस्था का कार्य पूरा हुआ है।
6 महीने में दोगुने चौड़े हुए दो प्रमुख चौराहे
दोनों चौराहों पर 10 मीटर चौड़ी मोटरेबल स्लिप रोड, राउंडअबाउट, उन्नत ट्रैफिक–सेफ्टी डिजाइन, आधुनिक लाइटिंग और पहाड़ी स्थापत्य शैली का सौंदर्यीकरण किया गया है। यातायात सुगमता बढ़ाने के साथ दुर्घटना जोखिम कम करना इसका प्रमुख उद्देश्य है।
कूठालगेट पर तीलू रौतेली, टीचरी माई सहित लोक–विभूतियों की झलक पर्यटकों और यात्रियों को उत्तराखंड की सांस्कृतिक पहचान का स्मरण कराती है।
लोक संस्कृति और राज्य आंदोलन का जीवंत प्रदर्शन
दोनों चौराहों को “लिविंग कल्चरल कॉरिडोर” के रूप में विकसित किया गया है, जहाँ— गढ़–कुमाऊँ की पारंपरिक स्थापत्य शैली, राज्य आंदोलन की स्मृति चिन्ह, धार्मिक–सांस्कृतिक कलाकृतियाँ, और स्थानीय लोक–विभूतियों की झलक स्थापित की गई है। प्रशासन का उद्देश्य है कि देहरादून आने वाला हर पर्यटक राज्य की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत को महसूस कर सके।
पहला चरण पूरा: चार प्रमुख चौराहों का रूपांतरण
प्रथम चरण में शहर के चार प्रमुख चौराहों का आधुनिकीकरण निर्धारित था। कुठालगेट और साई मंदिर तिराहे के बाद दिलाराम चौक का उच्च स्तरीय सौंदर्यीकरण कार्य भी लगभग पूरा हो चुका है। जिलाधिकारी के अनुसार, दिलाराम चौक पर पौराणिक और सांस्कृतिक स्थलों का लोकार्पण जल्द किया जाएगा।
आधुनिक और सांस्कृतिक राजधानी की ओर कदम
दून शहर में यह पहल— सुरक्षित यातायात, सौंदर्यीकरण, पारंपरिक शैली का संरक्षण, और पर्यटन-अनुकूल वातावरण को एक साथ बढ़ावा दे रही है। प्रशासन का दावा है कि यह परियोजना देहरादून को आधुनिक सुविधाओं के साथ सांस्कृतिक रूप से सम्पन्न राजधानी के रूप में विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
यह मॉडल परियोजना न केवल राज्य की सांस्कृतिक पहचान को मजबूत करती है, बल्कि दून को एक आकर्षक, व्यवस्थित और आधुनिक शहर के रूप में स्थापित करने की दिशा में बड़ा कदम साबित हो रही है।

