Saturday, March 7, 2026
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देहरादून में पहली बार घरेलू हिंसा पर गुंडा एक्ट लागू, डीएम ने दी दो टूक चेतावनी

देहरादून: देहरादून में एक बेहद मार्मिक व गंभीर मामला सामने आया है जहां एक असहाय विधवा महिला विजय लक्ष्मी पंवार, पत्नी स्व. मोहन सिंह पंवार, निवासी भागीरथपुरम बंजारावाला, अपने ही बेटों के अत्याचार से त्रस्त होकर जिलाधिकारी कार्यालय की शरण में पहुंची। विजय लक्ष्मी ने जिलाधिकारी सविन बंसल से गुहार लगाई कि उनके दोनों बेटे नशे के आदी, हिंसक व उग्र स्वभाव के हैं और आए दिन उनसे मारपीट करते हैं।

महिला ने बताया कि दोनों पुत्र – शुभम पंवार और एक अन्य – नशे की हालत में कभी आधी रात, कभी दो-तीन दिन बाद घर लौटते हैं और आते ही अफीम, गांजा और शराब के नशे में मां से मारपीट कर पैसों की मांग करते हैं। यहां तक कि उन्हें जान से मारने की धमकी भी दे चुके हैं, जिससे वह भयभीत हैं और उन्हें अपनी जान का खतरा है।

जिलाधिकारी ने दिखाई त्वरित कार्रवाई, पहली बार गुंडा एक्ट का हुआ सख्त प्रयोग
मामले की गंभीरता को देखते हुए जिलाधिकारी सविन बंसल ने उसी दिन गोपनीय जांच बैठाई। जांच में मोहल्ले के लोगों, पड़ोसियों और जनप्रतिनिधियों ने भी पुष्टि की कि महिला के दोनों बेटे लगातार उसे प्रताड़ित करते हैं और नशे की लत में हिंसक हो जाते हैं। गोपनीय जांच अधिकारी ने स्पष्ट सिफारिश दी कि “दोनों पुत्रों को प्रार्थिनी से दूर रखा जाना अति आवश्यक है।”

जिलाधिकारी ने कानून की पेचीदगियों से परे जाते हुए, मानवीय दृष्टिकोण को सर्वोपरि रखते हुए, गुंडा नियंत्रण अधिनियम 1970 के अंतर्गत दोनों बेटों पर मामला दर्ज कर दिया और 2 घंटे के भीतर ही दोनों को नोटिस तामील करवा दिए।

फास्ट ट्रैक में सुनवाई, 26 अगस्त को पेश होने का आदेश
दोनों बेटों को नोटिस जारी करते हुए 26 अगस्त 2025 को प्रातः 10:30 बजे न्यायालय में स्वयं अथवा अपने अधिवक्ता के माध्यम से उपस्थित होकर पक्ष रखने का आदेश दिया गया है। यदि वे इस समयावधि में जवाब नहीं देते, तो उनके विरुद्ध फास्ट ट्रैक प्रक्रिया के अंतर्गत कठोर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

प्रशासन का सख्त संदेश: शोषण करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा
यह मामला न केवल एक विधवा मां की पीड़ा की गवाही देता है, बल्कि जिला प्रशासन की तत्परता और संवेदनशीलता का भी उदाहरण बन गया है। डीएम द्वारा उठाया गया यह साहसिक कदम समाज में फैले पारिवारिक अत्याचारों पर रोक लगाने की दिशा में एक मजबूत संदेश है कि शोषण चाहे घर के अंदर हो या बाहर – अब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

जिला प्रशासन का संकल्प:
“हर पीड़ित की आवाज सुनी जाएगी, और हर अत्याचारी को कानून के कठघरे में खड़ा किया जाएगा।”

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