Sunday, March 8, 2026
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नंदा गौरा कन्या धन के लिए भटकतीं रहीं बेटियां, निदेशालय ने सरेंडर कर दिए 13.50 लाख

हल्द्वानी : है न अजीब बात। 2017 में इंटर पास बेटियां नंदा गौरा कन्या धन के लिए समाज कल्याण विभाग और महिला तथा बाल विकास विभाग में चार साल से भटकती रहीं। इधर, समाज कल्याण निदेशालय ने इस योजना के 13.50 लाख रुपये सरेंडर कर दिए।

असल में नंदा गौरा कन्या धन के नियम बड़े उलझे हुए हैं। वर्ष 2016 तक इस योजना का नाम नंदा देवी कन्या धन योजना हुआ करता था। तब इंटर पास होते ही बेटियों को 50 हजार रुपये दिए जाते थे। वर्ष 2017 में शासन ने योजना का नाम नंदा गौरा कन्या धन योजना रखा और महिला तथा बाल विकास विभाग को सौंप दिया। अब देखिए, जो धनराशि एकमुश्त 50 हजार मिलती थी। उसे सात चरणों में बांट दिया गया। पहला चरण जन्म होने पर पांच हजार, फिर एक साल, आठवीं, 10वीं व 12वीं पास होने पर पांच-पांच हजार, स्नातक करने पर 10 हजार व शादी करने पर 16 हजार।

वर्ष 2019 में शासन ने फिर नियम बदल दिए। सात चरणों में मिलने वाला नंदा गौरा कन्या धन दो चरणों में मिलने लगा। बेटियों को जन्म के समय 11 हजार व इंटर करने पर 51 हजार रुपये दे दिए। ताज्जुब की बात है कि 2017 में विभाग बदलने पर दोनों विभागों ने बेटियों की खूब फजीहत कराई। प्रदेश में सैंकड़ों बेटियों को इस योजना के रुपये आज तक नहीं मिल सके हैं। निदेशालय ने इस योजना का 13.50 लाख रुपये सरेंडर कर दिया।

जिले की 401 बेटियों ने किया आवेदन

वर्ष 2017 में योजना से वंचित रह चुकी छात्राओं से सीएम पुष्कर सिंह धामी ने दोबारा आवेदन करने को कहा था। महिला तथा बाल विकास विभाग के डीपीओ मुकुल ने बताया कि 17 दिसंबर अंतिम तिथि थी। जिले की 401 बेटियों ने दोबारा आवेदन कर दिया है। जांच के बाद छात्राओं की फाइल आगे बढ़ाई जाएगी।

समाज कल्याण ने किया कल्याण

समाज कल्याण विभाग के अधिकारियों ने माना है कि वर्ष 2017 में कई छात्राओं ने उनके पास आवेदन जमा कर दिए थे। जिन छात्राओं ने आवेदन किए, उन्हें नियमानुसार धनराशि दी गई। सवाल उठता है कि जब यह योजना महिला तथा बाल विकास विभाग के पास चली गई तो कुछ छात्राओं को ही धनराशि क्यों दी गई।

प्रदेश में इतनी छात्राओं को मिली धनराशि

वर्ष      छात्राएं

2018  52895

2019  51132

2020  50067

आवेदन करने वालों को मिला लाभ

समाज कल्याण विभाग निदेशक बीएल फिरमाल ने बताया कि 2017 में योजना महिला तथा बाल विकास विभाग के पास चली गई थी। कुछ छात्राओं ने समाज कल्याण में आवेदन किया। उन्हें योजना का लाभ मिला। बाकी 13.50 लाख रुपये सरेंडर कर दिए गए।

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