Sunday, March 8, 2026
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प्रदेश में बालक-बालिका अनुपात में सुधार, पांचवें राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण की रिपोर्ट

पांचवें राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण 2020-21 की रिपोर्ट में उत्तराखंड ने बालक-बालिका अनुपात में सुधार किया है। वर्ष 2015-16 की सर्वे रिपोर्ट में जहां प्रदेश में 0-5 आयु वर्ग तक के बच्चों का अनुपात 888 था। जो वर्ष 2020-21 में प्रति हजार बालकों के सापेक्ष 984 बालिकाओं का जन्म दर्ज किया गया।

स्वास्थ्य मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने इसे बड़ी उपलब्धि बताया है। उन्होंने बालक-बालिका अनुपात में बढ़ोतरी की वजह आम लोगों तक राज्य व केंद्र सरकार की स्वास्थ्य योजनाओं का लाभ पहुंचना, संस्थागत प्रसव व पीसीपीएनडीटी को सख्ती से लागू करना बताया है।

पांचवें राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण 2020-21 की रिपोर्ट के अनुसार राज्य में बालक-बालिका अनुपात में बेहतर सुधार हुआ है। इसके मुताबिक राज्य में 0-5 आयु वर्ग तक के बच्चों का अनुपात 984 दर्ज किया गया है। जो विगत वर्षों के मुकाबले कहीं अधिक है। अब राज्य में प्रति 1000 बालकों पर 984 बालिकाएं जन्म ले रही हैं। जबकि चौथी राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण रिपोर्ट 2015-16 में यह संख्या महज 888 थी।

इन जिलों में बालकों के मुकाबले बालिकाओं का जन्म हुआ कम

रिपोर्ट के अनुसार प्रदेश के पांच जनपदों अल्मोड़ा, चमोली, नैनीताल, पौड़ी व ऊधमसिंह नगर में प्रति एक हजार बालकों की तुलना में अधिक बालिकाओं का जन्म हुआ है। अल्मोड़ा में जहां 1444 बालिकाओं का जन्म हुआ। वहीं चमोली में 1026, नैनीताल में 1136, पौड़ी में 1065 व ऊधमसिंह नगर में 1022 बालिकाओं का जन्म हुआ। जबकि उत्तरकाशी में 869, देहरादून में 823 एवं टिहरी 866 में बालकों के मुकाबले बालिकाओं का जन्म अन्य जिलों के मुकाबले कम रहा। रिपोर्ट के मुताबिक बागेश्वर जनपद में प्रति एक हजार बालकों पर 940 बालिकाओं ने जन्म लिया। हरिद्वार में यह संख्या 985, पिथौरागढ़ में 911, रूद्रप्रयाग में 958, और चंपावत में 926 है।

पीसीपीएनडीटी कमेटियों से निष्क्रिय सदस्य हटाने के निर्देश

बीते दिन रुद्रप्रयाग में पीसीपीएनडीटी (गर्भधारण पूर्व एवं प्रसव पूर्व निदान तकनीकी अधिनियम) की प्रदेश स्तरीय कार्यशाला में सूबे के स्वास्थ्य मंत्री ने प्रदेश में बालक-बालिका अनुपात बढ़ाने को लेकर कई निर्णय लेते हुए विभागीय अधिकारियों को निर्देश दिए। उन्होंने पीसीपीएनडीटी कमेटियों में निष्क्रिय सदस्यों को हटाने व क्षेत्रीय विधायक की अध्यक्षता में प्रत्येक तीन माह में इन समितियों की बैठक कराने को कहा। विभागीय मंत्री ने संतुलित अनुपात के लिए सूबे के पांच जिलों में पीसीपीएनडीटी कार्यक्रम में विशेष ध्यान के निर्देश दिए।

राज्य में बालक-बालिका अनुपात को लगातार बेहतर किया जा रहा है। इसके लिए जागरूकता अभियान के साथ संस्थागत प्रसव पर सरकार का फोकस है। प्रदेश में भ्रूण जांच व पीसीपीएनडीटी अधिनियम का सख्ती से पालन कराया जा रहा है। कम बालक-बालिका अनुपात वाले जनपदों में विशेष ध्यान देने के लिए विभागीय अधिकारियों को निर्देश दे दिए गए हैं। -डॉ. धन सिंह रावत, स्वास्थ्य मंत्री

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