Sunday, March 8, 2026
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भाई वीर सिंह के पंजाबी साहित्य में योगदान को याद किया

देहरादून। भाई वीर सिंह की 150वीं जयंती पर डॉ. बलबीर सिंह साहित्य केंद्र देहरादून और सिख विश्वकोश विभाग, पंजाब विश्वविद्यालय पटियाला की ओर से प्रीतम रोड डालनवाला में दो दिवसीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। सोमवार को राज्यपाल लेफिटनेंट जनरल ‘से.नि.’ गुरमीत सिंह ने बतौर मुख्य अतिथि शिरकत की। मुख्य भाषण डॉ. जसपाल कौर विशेष भाषण डॉ. सुरजीत सिंह नारंग ने दिया।

सत्र की अध्यक्षता पंजाब यूनिवर्सिटी के कुलपति प्रो. अरविंद ने की। सेमिनार में चंडीगढ़, पटियाला, अमृतसर, दिल्ली और देहरादून विश्वविद्यालयों के प्राध्यापक दो दिन ‘भाई वीर सिंह का पंजाबी और सिख साहित्य में योगदान विषय पर अपने शोध पत्र पढ़ेंगे। पांच दिसंबर 1872 को अमृतसर में जन्मे भाई वीर सिंह को आधुनिक पंजाबी भाषा का जनक कहा जाता है, जिन्होंने अपने उपन्यासों, नाटकों, कविता, पवित्र इतिहास, संपादकीय नोट्स और संपादित कार्यों के माध्यम से लोगों के मन में पंजाबी और सिख साहित्य के लिए प्रेम पैदा किया। देहरादून से भाई वीर सिंह का जुड़ाव रहा। वे गर्मी के दिनों में अपने घर 20 प्रीतम रोड डालनवाला में रहते थे और साहित्य की रचना करते थे।

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