Saturday, March 7, 2026
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मुख्यमंत्री धामी ने जनजातीय कल्याण की योजनाओं का किया लोकार्पण, शिक्षकों को सौंपे नियुक्ति पत्र

देहरादून— मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शनिवार को मुख्यमंत्री आवास स्थित मुख्य सेवक सदन में जनजाति कल्याण विभाग के अंतर्गत संचालित राजकीय आश्रम पद्धति विद्यालयों में चयनित 15 सहायक अध्यापकों को नियुक्ति पत्र वितरित किए। इसके साथ ही उन्होंने 15 करोड़ रुपए से अधिक लागत की विभिन्न निर्माण योजनाओं का लोकार्पण एवं शिलान्यास भी किया।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने विश्वास जताया कि ये योजनाएं जनजातीय समाज को बेहतर आधारभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने के साथ-साथ सामाजिक विकास को भी मजबूती देंगी। उन्होंने नवचयनित शिक्षकों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि युवा शिक्षक नई पीढ़ी के समग्र विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में जनजातीय समाज के उत्थान के लिए कई ऐतिहासिक कदम उठाए गए हैं। भगवान बिरसा मुंडा की जयंती को ‘जनजातीय गौरव दिवस’ के रूप में मनाना, इस दिशा में एक महत्वपूर्ण निर्णय है। मुख्यमंत्री ने पूर्ववर्ती सरकारों पर निशाना साधते हुए कहा कि वे केवल दिखावे के लिए आदिवासी समाज के विकास की बातें करती थीं, जबकि वर्तमान केंद्र सरकार जमीनी स्तर पर ठोस कार्य कर रही है।

मुख्यमंत्री धामी ने बताया कि केंद्र सरकार ने जनजातीय कल्याण के बजट को तीन गुना बढ़ा दिया है। साथ ही, एकलव्य मॉडल स्कूल, प्रधानमंत्री जनजातीय उन्नत ग्राम अभियान, वन धन योजना और जनजातीय विकास मिशन जैसी योजनाएं संचालित की जा रही हैं। उत्तराखंड के 128 जनजातीय गांवों को “प्रधानमंत्री जनजातीय उन्नत ग्राम अभियान” के अंतर्गत चुना गया है।

वर्तमान में राज्य में चार एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालय—कालसी, मेहरावना, बाजपुर और खटीमा में संचालित हो रहे हैं, जहां जनजातीय समुदाय के छात्रों को नि:शुल्क शिक्षा और हॉस्टल की सुविधा मिल रही है। इसके अलावा, सीमांत जनपद पिथौरागढ़ में भोटिया और राजी जनजातियों के लिए एकलव्य विद्यालय की स्थापना हेतु केंद्र सरकार से अनुरोध किया गया है।

राज्य सरकार की योजनाओं की जानकारी देते हुए मुख्यमंत्री ने बताया कि आदिवासी समाज के बच्चों को प्राथमिक से लेकर स्नातकोत्तर स्तर तक छात्रवृत्ति प्रदान की जा रही है। राज्य में 16 राजकीय आश्रम पद्धति विद्यालयों का संचालन किया जा रहा है, साथ ही तीन आईटीआई संस्थानों के माध्यम से तकनीकी शिक्षा भी दी जा रही है। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए कोचिंग और छात्रवृत्ति की व्यवस्था भी की गई है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि भगवान बिरसा मुंडा के आदर्शों से प्रेरणा लेते हुए उत्तराखंड सरकार राज्य की सांस्कृतिक धरोहर और जनसांख्यिकी को संरक्षित रखने हेतु कृतसंकल्प है। इसके तहत राज्य में सख्त धर्मांतरण विरोधी कानून लागू किया गया है। साथ ही, समान नागरिक संहिता कानून को देश में सबसे पहले उत्तराखंड में लागू किया गया है, लेकिन जनजातीय समुदाय की परंपराओं के संरक्षण हेतु उन्हें इस कानून से बाहर रखा गया है।

मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर जनजातीय शोध संस्थान में सौंदर्यीकरण, बालिकाओं के लिए हाईटेक शौचालय ब्लॉक और आदि लक्ष्य संस्थान में डाइनिंग हॉल के निर्माण की घोषणा भी की।

कार्यक्रम में कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी, विधायक खजान दास, उमेश शर्मा काऊ, सविता कपूर, दलीप सिंह रावत, प्रमोद नैनवाल, जनजाति आयोग की अध्यक्ष लीलावती राणा, समाज कल्याण सचिव श्रीधर बाबू अद्दांकी, जनजाति कल्याण निदेशक संजय टोलिया, समाज कल्याण निदेशक चंद्र सिंह धर्मशक्तू समेत कई विभागीय अधिकारी उपस्थित रहे।

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