केदारनाथ मंदिर में कपाट बंद होने की प्रक्रिया रविवार को प्रारंभ हो गई। प्रक्रिया के तहत भकुंट भैरव की आज्ञा लेने के बाद मंदिर के गर्भगृह में स्थापित स्वयंभू लिंग के ठीक ऊपर लगे स्वर्ण छत्र और कलश को उतार लिया गया। इससे पहले केदारसभा की ओर से बाबा केदार की विशेष पूजा संपन्न कराई गई।
सोमवार से अब भगवान केदारनाथ की बिना श्रृंगार के आरती की जाएगी। इस पारंपरिक धार्मिक अनुष्ठान को पंचपंडा रुद्रपुर के हक-हकूकधारियों ने सम्पन्न किया। इस अवसर पर केदारसभा के अध्यक्ष राजकुमार तिवारी, महामंत्री अंकित सेमवाल, अनीत शुक्ला, ब्लॉक प्रमुख पंकज शुक्ला समेत कई अन्य गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
कपाट बंद होने से पूर्व मंदिर को लगभग तीन क्विंटल गेंदे के फूलों से भव्य रूप से सजाया गया है। पूरे धाम में दीपावली के उपलक्ष्य में दीपोत्सव का आयोजन किया जा रहा है।
वहीं, बदरीनाथ धाम में भी दीपावली सोमवार को धूमधाम से मनाई जा रही है। मंदिर को गेंदे, गुलाब और अन्य पुष्पों से आकर्षक ढंग से सजाया गया है। मंदिर परिसर में आकर्षक आकृतियाँ उकेरी गई हैं। दीपोत्सव का आयोजन बीकेटीसी (बदरी-केदार मंदिर समिति) द्वारा तीर्थ पुरोहितों और हक-हकूकधारियों के सहयोग से किया जा रहा है।
डिमरी केंद्रीय पंचायत, मेहता, भंडारी, कमदी हकहकूकधारी मिलकर दीप प्रज्ज्वलित कर रहे हैं। मुंबई, गुजरात और सिलीगुड़ी से आए श्रद्धालुओं ने कहा कि फूलों से सजा बदरीनाथ मंदिर अत्यंत भव्य और अद्भुत दिखाई दे रहा है।
बीकेटीसी अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने बताया कि दीपावली के अवसर पर मंदिर परिसर के साथ ही मार्गों को भी दीपों से सजाया गया है, जिससे सम्पूर्ण धाम दिव्य आभा से आलोकित हो उठा है।

