Sunday, March 8, 2026
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मोदी को तीर्थ पुरोहितों ने भेजा खून से लिखा पत्र

उत्तराखंड चारधाम देवस्थानम प्रबंधन बोर्ड का विरोध लंबे समय से जारी है। इसी बीच अपनी मांगों को लेकर केदारनाथ धाम में धरना दे रहे तीर्थ पुरोहितों और हक हकूकधारियों ने एक बड़ा निर्णय लिया है। जिसके तहत केदारनाथ धाम के तीर्थ पुरोहित संतोष त्रिवेदी ने खून से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम एक पत्र लिखा है। जिसमें इस बात का जिक्र किया है कि राज्य सरकार उनकी सदियों से चली आ रही परंपराओं के साथ खिलवाड़ कर रही है ऐसे में देवस्थानम प्रबंधन बोर्ड को भंग किया जाना चाहिए।

केदारनाथ धाम परिसर में पिछले 58 दिनों से तीर्थ पुरोहित और हक हकूकधारी लगातार देवस्थानम प्रबंधन बोर्ड को भंग किए जाने की मांग कर रहे हैं। हालांकि इस संबंध में तीर्थ पुरोहितों ने राज्य सरकार को इस बाबत भी चेतावनी दे दी है कि अगर राज्य सरकार उनकी मांगों को नहीं मानती है तो वह 17 अगस्त से राज्य स्तरीय आंदोलन करने के लिए बाध्य होंगे जिसके कार्यक्रम भी उन्होंने तय कर दी हैं।

इसके साथ ही सरकार को चेतावनी दी है कि वह किसी दबाव में नहीं आएंगे तथा आर-पार की लड़ाई के लिए तैयार हैं। इस घटनाक्रम के बाद आने वाले दिनों में चारों धामों में तनाव स्थिति बन सकती है। इधर, चारधाम महापंचायत ने मुख्यमंत्री की घोषणा पर अमल न किए जाने पर नाराजगी जताई है। वही, तीर्थ पुरोहितो का कहना है कि मुख्यमंत्री ने हाईपावर कमेटी बनाई जाने की बात कही थी, लेकिन इस पर अभी कोई होमवर्क नहीं किया गया है। क्योकि सरकार इस दिशा में गंभीर दिखाई नही दे रही है।

 

चारधाम देवस्थानम प्रबंधन बोर्ड को भंग किए जाने की मांग को लेकर तीर्थ पुरोहित और हक-हकूकधारियो ने यह स्पष्ट कर दिया है कि 17 अगस्त से वह राज्यव्यापी आंदोलन करेंगे। जिसके तहत पहले चरण में चारों धामों समेत कई शहरों में धरना प्रदर्शन करेंगे। इसके बाद अगर राज्य सरकार फिर भी उनकी मांगों पर गौर नहीं करती है तो 16 सितंबर को मुख्यमंत्री आवास कूच करेंगे।

 

चारधाम देवस्थानम प्रबंधन कानून से नाराज तीर्थ पुरोहितों के आंदोलन और भाजपा की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा देने के सवाल पर मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का स्टैंड एकदम साफ है। इस मामले में प्रदेश सरकार ने हाईपावर कमेटी बना दी है। यह कमेटी चारधाम से जुड़े सभी लोगों की बात सुनेगी। उनकी बातें सुनने के भादवा हल निकालेंगे तब तक देवस्थानम प्रबंधन बोर्ड की यथास्थिति रहेगी, उस पर रोक लगाई जा रही है।

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