Sunday, March 8, 2026
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सावन की शिवरात्रि आज, सुबह व्रत और रात को होगा जलाभिषेक

देहरादून : शिव के प्रिय माह सावन की शिवरात्रि आज मनाई जाएगी। जलाभिषेक का शुभ मुहूर्त शाम 6:49 बजे कृष्ण चतुदर्शी लगते ही शुरू होगा, जो बुधवार पूरे दिन रहेगा। जलाभिषेक के लिए श्रद्धालुओं को कोई परेशानी न हो इसके लिए मंदिर में सेवादार तैनात रहेंगे।

सावन में शिवलिंग पर अभिषेक का विशेष महत्व है। यह महीना भगवान भोलेनाथ की पूजा के लिए समर्पित है। धार्मिक मान्यता है कि अन्य दिनों की अपेक्षा सावन में शिवलिंग की पूजा और अभिषेक करने से कई गुना फल की प्राप्ति होती है।

आचार्य शिव प्रसाद ममगाईं के अनुसार सावन कृष्ण पक्ष की चतुदर्शी को शिवरात्रि मनाई जाती है। इस बार सावन माह की चतुदर्शी मंगलवार 6:49 के बाद शुरू हो रही है। ऐसे में 26 यानी आज ही शिवरात्रि मनाई जाएगी, जबकि जलाभिषेक 27 को भी कर सकते हैं।

मंदिरों में तैयारी पूरी

सावन शिवरात्रि में श्रद्धालुओं की भीड़ को लेकर मंदिर समितियों ने व्यवस्था बना रखी है। एतिहासिक टपकेश्वर महादेव मंदिर और जंगम शिवालय के महंत श्री 108 कृष्णागिरी महाराज ने बताया कि कोरोनाकाल के दो साल बाद इस बार भगवान भोलेनाथ के दर्शन को लेकर देहरादून के अलावा उत्तरप्रदेश, हरियाणा, दिल्ली से भी श्रद्धालु पहुंच रहे हैं।

मंदिर में व्यवस्था बेहतर बनी रहे इसके लिए पुलिस के साथ सेवादार भी तैनात रहेंगे। सहारनपुर चौक स्थित पृथ्वीनाथ महादेव मंदिर के सेवादार संजय गर्ग ने बताया कि मंदिर में श्रद्धालुओं के लिए गंगाजल चढ़ाने के लिए व्यवस्था बना रखी है।

108 लीटर दूध से भोलेनाथ का दुग्धाभिषेक किया जाएगा। शाम को सूखे मेवे का श्रृंगार होगा। कांवड यात्रियों के लिए जलाभिषेक की अगल से लाइन होगी।

इस बार बन रहा शिव-गौरी संयोग

आचार्य डा. सुशांत राज के मुताबिक इस सावन शिवरात्रि पर शिव-गौरी संयोग बन रहा है। इस संयोग में भगवान शिव की आराधना करने से शिव के साथ मां पार्वती का भी आशीर्वाद मिलेगा। शिव-गौरी संयोग में आज मंगला गौरी का व्रत भी किया जाता है, जो मां पार्वती को समर्पित है। ऐसा संयोग वर्षों बाद आया है।

टपकेश्वर में सुबह से ही लगी कतार

टपकेश्वर महादेव मंदिर में सुबह चार बजे श्रद्धालुओं के दर्शन को कपाट खोल दिए गए। सुबह से ही यहां लाइन में लगकर श्रद्धालु जलाभिषेक करते रहे। मंदिर के मुख्य गेट तक श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी रही। शिवलिंग पर जल, दूध, दही जैसे कई द्रव्यों से अभिषेक करने के साथ आराधना की।

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