Sunday, March 8, 2026
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जितेंद्र नारायण त्यागी ने श्रीमहंत रविंद्र पुरी महाराज से की भेंट, कहा- जेल में रहने के दौरान मन में जागृत हुई संन्यास इच्छा

हरिद्वार : उत्तर प्रदेश शिया वफ्फ बोर्ड के पूर्व अध्यक्ष रहे जितेंद्र नारायण त्यागी (पहले का नाम वसीम रिजवी) ने अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद निरंजनी के अध्यक्ष और निरंजनी अखाड़े के सचिव श्रीमहंत रविंद्र पुरी महाराज से भेंट की।

संन्यास इच्छा की भावना जागृत हुई

मंगलवार को हुई इस भेंट को उन्‍होंने शिष्टाचार भेंट बताया। कहां की पूर्व में जेल में रहने के दौरान उनके मन में संन्यास इच्छा की भावना जागृत हुई थी। उनकी आज की मुलाकात इसी सिलसिले में है, क्योंकि वह जानना चाहते हैं कि इस्लाम छोड़कर हिंदू धर्म स्वीकार करने वाले व्यक्ति के लिए संन्‍यास लेने के क्या-क्या धार्मिक विधान हैं और उसे कौन-कौन से कर्मकांड करने होंगे।

निजी शिष्टाचार मुलाकात

उन्होंने स्पष्ट किया कि आज से पहले खुद के संन्यास लेने संबंधी उन्होंने कोई बयान नहीं दिया था। कहा कि कोर्ट के आदेश पर वह आज भी अधिकृत तौर पर कोई बयान नहीं दे रहे, वह सिर्फ निजी शिष्टाचार मुलाकात और अपनी जिज्ञासा शांत करने के लिए श्रीमहंत रविंद्र पुरी महाराज से भेंट करने निरंजनी अखाड़ा आए हैं। इस मौके पर उनके साथ स्वामी आनंद स्वरूप भी मौजूद रहे।

ज्ञानवापी मामले में पूर्ववर्ती सरकारों को लिया निशाने पर

अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद निरंजनी के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्रीमहंत रविंद्र पुरी ने ज्ञानवापी में शिवलिंग मिलने की बात को हिंदू धर्म और हिंदू समाज को पहुंचाए गए नुकसान का प्रत्यक्ष उदाहरण बताया। उन्‍होंने पूर्ववर्ती सरकारों में इस सच को सामने ना लाने की बात को दुर्भाग्यपूर्ण बताया। श्रीमहंत रविंद्र पुरी ने मुस्लिम समाज से हिंदू धर्म के हित में और सांप्रदायिक सौहार्द बनाए रखने के लिए ज्ञानवापी मस्जिद पर से अपना दावा छोड़ने का आह्वान भी किया।

साथ ही उन्होंने मथुरा मामले में भी मुस्लिम समाज से इसी तरह के बर्ताव की अपेक्षा की। उन्‍होंने सपा नेता अखिलेश यादव को मौका परस्त बताया। कहा कि विधानसभा चुनाव के दौरान उन्हें सपने में भी भगवान श्री कृष्ण नजर आते थे पर चुनाव में मिली हार के बाद उन्होंने ज्ञानवापी और मथुरा आदि मामलों में चुप्पी साध ली है। आरोप लगाया कि अखिलेश यादव की यह हरकत बताती है कि हिंदू धर्म को लेकर उनकी आस्था और विश्वास सिर्फ वोट की राजनीति तक ही सीमित है।

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