रुड़की। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शुक्रवार को रुड़की स्थित जीवनदीप आश्रम में आयोजित पाँच दिवसीय धार्मिक एवं सामाजिक महोत्सव में प्रतिभाग किया। कार्यक्रम में उन्होंने संत-महात्माओं, धर्माचार्यों और श्रद्धालुओं का स्वागत करते हुए कहा कि संत समाज जीवन्त तीर्थ के समान है, जो समाज को सद्मार्ग की ओर प्रेरित करता है।
मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर स्वामी सत्यमित्रानंद गिरी सभागार, श्री सिद्धबली हनुमान द्वार और शहीद चौक का लोकार्पण एवं उद्घाटन किया। उन्होंने घोषणा की कि मैंन मार्ग से सुनहरा मार्ग चौराहे को अब “शहीद चौक” के नाम से जाना जाएगा। उन्होंने कहा कि यह चौक हमारे अमर शहीदों के साहस और राष्ट्रभक्ति का प्रतीक बनेगा।
सनातन संस्कृति के पुनर्जागरण का उल्लेख
मुख्यमंत्री ने परमपूज्य ब्रह्मलीन स्वामी सत्यमित्रानंद गिरी जी महाराज को नमन करते हुए कहा कि उन्होंने राष्ट्र, धर्म और मानवता की सेवा में अपना जीवन अर्पित किया। उन्होंने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में विश्वभर में भारत की सनातन संस्कृति का गौरव बढ़ा है।
उन्होंने राम मंदिर निर्माण, बद्रीनाथ–केदारनाथ धाम पुनर्निर्माण, काशी विश्वनाथ कॉरिडोर, महाकाल लोक जैसे परियोजनाओं को सांस्कृतिक चेतना के पुनर्जागरण के ऐतिहासिक कदम बताया।
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार उत्तराखंड को “विश्व की आध्यात्मिक राजधानी” बनाने के संकल्प के साथ कार्य कर रही है। केदारखंड और मानसखंड मंदिर क्षेत्रों का सौंदर्यीकरण, हरिद्वार–ऋषिकेश कॉरिडोर, शारदा कॉरिडोर, तथा दून विश्वविद्यालय में सेन्टर फॉर हिन्दू स्टडीज़ की स्थापना—इसी दिशा में उठाए गए महत्वपूर्ण कदम हैं।
शतचंडी महायज्ञ से लेकर सामूहिक विवाह तक—महोत्सव ने दिया सेवा का संदेश
जीवनदीप आश्रम के इस पाँच दिवसीय महोत्सव में शतचंडी महायज्ञ, श्री भक्तमाल कथा, 1100 बालिकाओं का पूजन, पाठ्य सामग्री वितरण और पाँच कन्याओं के सामूहिक विवाह जैसे आयोजन हुए। मुख्यमंत्री ने 11 कन्याओं का पूजन कर उन्हें उपहार और दक्षिणा भेंट की, जबकि छह कन्याओं के सामूहिक विवाह पर आशीर्वाद दिया।
मुख्यमंत्री की धर्मपत्नी श्रीमती गीता धामी भी कार्यक्रम में उपस्थित रहीं। उन्होंने कहा कि जीवनदीप आश्रम सनातन धर्म के संरक्षण और समाजसेवा में निरंतर कार्य कर रहा है।
राज्य की सुरक्षा, संस्कृति और युवाओं के हित के लिए कड़े कदम
मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि सरकार प्रदेश की सांस्कृतिक एवं सामाजिक संरचना की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने बताया कि— धर्मांतरण विरोधी कानून और सख्त दंगारोधी कानून लागू किए गए हैं। लैंड जिहाद, लव जिहाद जैसी गतिविधियों पर कठोर कार्रवाई की गई है। लैंड जिहाद में 9 हजार एकड़ से अधिक भूमि को मुक्त कराया गया। प्रदेश में समान नागरिक संहिता (UCC) लागू कर समान कानून व्यवस्था स्थापित हुई। नकल विरोधी कानून से 26 हजार से अधिक युवाओं को सरकारी नौकरी मिली। 250 से अधिक अवैध मदरसों को सील कर नया कानून लागू किया गया, जिसके अनुसार 1 जुलाई 2026 से गैर-मानक मदरसे स्वतः बंद हो जाएंगे। ऑपरेशन कालनेमि के अंतर्गत सनातन धर्म को बदनाम करने वालों पर कड़ी कार्रवाई हुई।
उत्तराखंड को श्रेष्ठ राज्य बनाने का लक्ष्य
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार “विकल्प रहित संकल्प” के साथ उत्तराखंड को देश का अग्रणी राज्य बनाने के लिए कार्यरत है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि संतों के आशीर्वाद और जनसहयोग से उत्तराखंड शीघ्र ही एक आदर्श राज्य के रूप में स्थापित होगा।
संत-महात्माओं एवं जनप्रतिनिधियों की रही गरिमामयी उपस्थिति
कार्यक्रम में जूना अखाड़ा के महामंडलेश्वर यतीन्द्रानन्द गिरी महाराज, अखाड़ा परिषद अध्यक्ष श्रीमहंत रविन्द्र पुरी, स्वामी प्रबोधानंद गिरी, स्वामी रूपेंद्र प्रकाश, स्वामी मैत्रेयी गिरी सहित अनेक संतजनों की उपस्थिति रही। इसके साथ ही राज्य मंत्री, जनप्रतिनिधि, मेयर, विधायक, जिला अधिकारी, पुलिस अधिकारी और बड़ी संख्या में श्रद्धालु एवं स्थानीय नागरिक उपस्थित रहे।

