Saturday, March 7, 2026
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मनसा देवी मंदिर हादसे के बाद भी आस्था अडिग, सावन सोमवार पर उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़

हरिद्वार: रविवार को हरिद्वार स्थित प्रसिद्ध मनसा देवी मंदिर के पैदल मार्ग पर हुई भगदड़ में आठ श्रद्धालुओं की दर्दनाक मौत और 30 से अधिक के घायल होने के बावजूद श्रद्धालुओं की आस्था में कोई कमी नहीं दिखी। सावन के सोमवार के अवसर पर मंदिर में श्रद्धालुओं की भीड़ फिर उमड़ पड़ी है।

हादसे के बाद रोपवे के बजाय पैदल मार्ग पर आज भी भारी भीड़ देखी गई। सुरक्षा के लिहाज से मंदिर मार्ग पर अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है और प्रशासन की ओर से श्रद्धालुओं को व्यवस्थित करने के प्रयास किए जा रहे हैं।

कैसे हुआ हादसा?
रविवार सुबह करीब 9 बजे, मनसा देवी मंदिर के पैदल मार्ग पर अचानक भगदड़ मच गई। हादसे में 12 वर्षीय एक बालक सहित आठ श्रद्धालुओं की जान चली गई, जबकि दर्जनों घायल हुए।

एक चश्मदीद के मुताबिक, भीड़ के दबाव के कारण कुछ श्रद्धालु पास की दीवारों पर लगी बिजली की तारों को छू बैठे, जिससे करंट फैलने की अफवाह फैल गई। इसके बाद अफरातफरी मच गई, और श्रद्धालुओं ने जान बचाने के लिए धक्का-मुक्की शुरू कर दी।

श्रद्धालुओं की जुबानी:
फरीदाबाद से आईं श्रद्धालु ने बताया,

“मैं मंदिर से थोड़ी दूरी पर थी, तभी किसी ने चिल्लाकर करंट फैलने की बात कही। लोग घबरा गए और ऊपर से नीचे की ओर धक्का-मुक्की शुरू हो गई। इसके बाद मुझे होश अस्पताल में ही आया।”

दिल्ली के श्रद्धालु ने घटना को बेहद खौफनाक बताया,

“मैंने अपनी आंखों से चार लोगों को मृत पड़े देखा। सीढ़ियों पर भारी भीड़ थी, लोग अचानक भागने लगे और भगदड़ मच गई। मैं इस मंजर को जीवन भर नहीं भूल पाऊंगा।”

घायल श्रद्धालु:

गायन्ति देवी (छपरा, बिहार)

रीना देवी (पश्चिम बंगाल)

आरती (स्थान अज्ञात)
शामिल हैं। सभी का उपचार अस्पताल में जारी है और उनकी हालत में धीरे-धीरे सुधार हो रहा है।

प्रशासन सतर्क, पुलिस मुस्तैद
हादसे के बाद मंदिर मार्ग पर सुरक्षा बढ़ा दी गई है। जगह-जगह पुलिसकर्मी तैनात हैं। भीड़ को नियंत्रित करने और श्रद्धालुओं को सुरक्षित रूप से मंदिर तक पहुंचाने के लिए प्रशासन ने कई दिशा-निर्देश लागू किए हैं।

हादसा बेहद दुखद रहा, लेकिन इसके बावजूद भक्तों की आस्था डगमगाई नहीं। सावन सोमवार को भोलेनाथ के दर्शन के लिए हजारों श्रद्धालु आज भी मंदिर पहुंच रहे हैं। प्रशासन अब सतर्क है, पर ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए स्थायी प्रबंध की आवश्यकता है।

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