हरिद्वार । धर्मनगरी हरिद्वार में साधु-संतों की सेवा और जरूरतमंदों को निशुल्क भोजन कराने वाले आश्रमों और अखाड़ों के अन्नक्षेत्र इन दिनों रसोई गैस संकट से जूझ रहे हैं। गैस सिलिंडरों की आपूर्ति बाधित होने के कारण कई अन्नक्षेत्रों में भोजन बनाना मुश्किल हो गया है और भोजन व्यवस्था डगमगाने लगी है।
स्थिति यह है कि जल्द गैस सिलिंडरों की उपलब्धता नहीं हुई तो प्रतिदिन हजारों लोगों को प्रसाद स्वरूप भोजन कराने वाले कई अन्नक्षेत्रों को बंद करने की नौबत आ सकती है।
हरिद्वार के प्रमुख अन्नक्षेत्रों में Geeta Kutir Tapovan, Banshiwale Baba Ashram, Bharat Mata Mandir Haridwar और Jagadguru Ashram समेत 20 से अधिक आश्रम और संस्थान शामिल हैं। इन अन्नक्षेत्रों में प्रतिदिन बड़ी संख्या में साधु-संतों, ब्राह्मणों, विद्यार्थियों और यात्रियों को निशुल्क भोजन कराया जाता है।
गीता कुटीर में सोमवार तक ही व्यवस्था
उत्तरी हरिद्वार स्थित गीता कुटीर अन्नक्षेत्र वर्ष 1979 से संचालित हो रहा है, जहां प्रतिदिन करीब 1200 साधु-संत और विद्यार्थी भोजन करते हैं। प्रबंधक शिवदास दुबे के अनुसार प्रतिदिन लगभग 10 गैस सिलिंडरों की आवश्यकता होती है, लेकिन पिछले एक सप्ताह से आपूर्ति बंद है। ऐसे में अन्नक्षेत्र सोमवार तक ही चल पाने की स्थिति में है।
आश्रमों ने प्रशासन से लगाई गुहार
Chetan Jyoti Ashram के श्रीमहंत स्वामी ऋषेश्वरानंद महाराज ने बताया कि यहां रोज करीब 400 लोगों के लिए भोजन बनता है और गैस सिलिंडर लगभग समाप्त होने की स्थिति में हैं। प्रशासन को पत्र लिखकर सिलिंडर उपलब्ध कराने की मांग की गई है।
वहीं Banshiwale Baba Ashram के प्रबंधक विपिन कुमार ने बताया कि यहां प्रतिदिन 1200 से अधिक साधु-संतों और जरूरतमंदों के लिए भोजन बनता है, लेकिन होली के बाद से गैस सिलिंडर नहीं मिल पा रहे हैं।
भारत माता मंदिर के तीन आश्रमों में भी संकट
Bharat Mata Mandir Haridwar के श्रीमहंत एवं महामंडलेश्वर स्वामी ललितानंद गिरि महाराज ने बताया कि तीन आश्रमों में प्रतिदिन आठ से दस गैस सिलिंडरों की आवश्यकता होती है, लेकिन एक सप्ताह से सिलिंडर उपलब्ध नहीं हो पा रहे हैं।
जिला खाद्य आपूर्ति अधिकारी Mukesh Pal ने बताया कि अन्नक्षेत्रों की गैस जरूरत को गंभीरता से लिया जा रहा है। जिलाधिकारी की ओर से एसओपी बनाई गई है, जिसके तहत अन्नक्षेत्रों को प्राथमिकता के आधार पर सिलिंडर उपलब्ध कराने के लिए एजेंसियों को संस्तुति की जा रही है।
ऋषिकेश में खिचड़ी से चल रहा काम
ऋषिकेश में भी गैस बचाने के लिए अन्नक्षेत्रों में रोटी-सब्जी के बजाय सुबह-शाम खिचड़ी बनाई जा रही है। Baba Kali Kamli Panchayati Kshetra की धर्मशालाओं में रोजाना सैकड़ों साधु-संतों और संस्कृत महाविद्यालय के छात्रों को इसी व्यवस्था के तहत भोजन कराया जा रहा है।

