Saturday, March 7, 2026
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किसने कहा ऐसा कि हमने मोदी से वादा किया है, वरना तुम्हारे लिए तो 30 गोलियां ही बहुत हैं

हमने मोदी से वादा किया कि हिंदुस्तानियों को कुछ नहीं होने दिया जाएगा। वरना, तुम्हारे लिए तो 30 मरनी (गोलियां) ही बहुत हैं। यहां क्यों आए थे हमारे देश। अगर नौकरी करनी है तो किसी बेगैरत मुल्क में जाकर करो। एक तालिबानी की ये बातें सुनकर दून के यशपाल सिंह की सांस अधर में आ गई थी। एक पल को लगा कि सब कुछ खत्म हो जाएगा, लेकिन फिर इसी तालिबानी ने यशपाल और उनके साथियों को जाने दिया।
अफगानिस्तान से सकुशल वापस लौटकर आए दून के हरिपुर सेलाकुई निवासी यशपाल सिंह ने वहां के हालात बयां किए। यशपाल सिंह वहां एक बैंक में आईटी हेड के पद पर तैनात थे, लेकिन तख्तापलट के बाद वह अपने साथियों के साथ एक कमरे में बंद हो गए। उनके ग्रुप में कुल 89 लोग थे। यशपाल सिंह बताते हैं कि वह 17 अगस्त को कमरे से बाहर आ गए थे। बताया गया था कि उन्हें यहां से निकाला जा रहा है। इसके अगले दिन उनके बाकी साथी भी साथ आ गए। जैसे ही वह एयरपोर्ट के बाहर पहुंचे तो वहां के हालात देखकर उनकी सांसें थम गई। भीड़ इतनी ज्यादा थी कि लग रहा था कि अगर भगदड़ मची तो कोई नहीं बचेगा। वहां पर ब्रिटिश आर्मी और तालिबान स्थानीय लोगों की भीड़ को नियंत्रित करने के लिए ब्लैंक फायर कर रहे थे। डर था कि अगर हालात बिगड़ गए तो यह दोनों गोलियां भी चला सकते हैं। जैसे-तैसे सभी 89 लोगों ने एक दीवार के पीछे पनाह ली।यहां और भी डर लग रहा था। सुबह सात बजे से एक बजे तक वहां बैठे रहे। इसके बाद यशपाल सिंह ने एक ब्रिटिश सैनिक से बात की। उसने कहा कि वह उन्हें नाटो बेस तक पहुंचा देंगे, लेकिन वहां कोई भी वाहन या हेलिकॉप्टर नहीं था। इसके बाद उन्होंने एक होटल में रहने की व्यवस्था की। इसके बाद उनका संपर्क डेनमार्क एंबेसी के अधिकारियों से हुआ। उनकी मदद से ही सभी लोग वहां से निकल पाए।
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ब्रिटिश आर्मी की मेस से पैसों से लिया खाना
सभी लोगों ने कुछ नहीं खाया था। होटल में खाना तो था, लेकिन वह ब्रिटिश आर्मी के लिए ही था। ऐसे में जिन लोगों के पास ड्राई फ्रूट थे उन्होंने वह खाकर काम चलाया, लेकिन 20 अगस्त की शाम तक सभी की हालत खराब हो गई। इसके बाद फिर यशपाल सिंह ने ब्रिटिश आर्मी के एक अधिकारी से बात की। उसने कहा कि वह खाना तो दे देंगे, लेकिन इसके लिए उन्हें पैसे देने होंगे। सभी लोग तैयार हो गए और ब्रिटिश आर्मी की मेस से उन्हें खाना दिया गया।
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तालिबानी बोला- मैं आजादी के लिए 18 सालों से सोया नहीं हूं
होटल में जाने से पहले यशपाल और उनके साथियों की मुलाकात इस तालिबानी से हुई थी। उसने यशपाल से कहा कि तुम लोग हमारे देश में क्यों आए हो। अगर हम तुम्हारे देश में चले जाएंगे तो तुम्हें कैसा लगेगा। मैं 18 सालों से अपने देश की आजादी के लिए सोया नहीं हूं। यशपाल के मुताबिक वह गुस्से में लग रहा था। उस वक्त ऐसा लगा कि मानो हम सब किडनैप हो जाएंगे, लेकिन उसी तालिबानी ने उन्हें आगे जाने की इजाजत दे दी।

इस्लामाबाद के रास्ते दिल्ली जाने से कर दिया था मना
पल पल बदलती रणनीति वहां फंसे लोगों के दिल में डर पैदा कर रही थी। पहले ब्रिटिश आर्मी ने उन्हें एयरपोर्ट पहुंचाने के लिए चॉपर का इंतजाम करने के लिए कहा, लेकिन चॉपर पायलट ने संख्या देखकर मना कर दिया। इसके बाद बस की बात हुई तो पता लगा कि नाटो देशों के लोगों को इन बसों से ले जाया जा रहा है। इसके बाद डेनमार्क के लोगों के साथ उम्मीद बंधी तो उन्होंने कहा कि वह उन्हें इस्लामाबाद के रास्ते दिल्ली पहुंचा देंगे, लेकिन दून वासियों ने मना कर दिया। क्योंकि, पाकिस्तान से भारत के संबंध अच्छे नहीं हैं।

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