काठमांडू— नेपाल में हाल ही में उभरे जेन-जी आंदोलन ने पूरे देश में उथल-पुथल मचा दी है। हिंसक प्रदर्शनों, आगजनी और तोड़फोड़ ने न केवल सरकारी ढांचे को गंभीर क्षति पहुंचाई है, बल्कि देश की न्यायिक प्रणाली भी इसकी चपेट में आ गई है।
नेपाल के सुप्रीम कोर्ट ने पुष्टि की है कि विरोध के दौरान कोर्ट भवन में हुई तोड़फोड़ और आगजनी के चलते देश के न्यायिक इतिहास से जुड़े महत्वपूर्ण दस्तावेज नष्ट हो गए हैं। मुख्य न्यायाधीश प्रकाशमान सिंह राउत ने इस घटना को दुखद बताते हुए कहा, “हम सभी परिस्थितियों में न्याय के मार्ग पर अडिग और दृढ़ हैं। नागरिकों की अपेक्षाओं को पूरा करने के लिए अदालती कामकाज जल्द फिर से शुरू किया जाएगा।”
मुख्य न्यायाधीश ने देशभर में फैली हिंसा, लूटपाट और अदालतों को नुकसान पहुंचाने की घटनाओं पर शोक जताया। उन्होंने हिंसा में मारे गए नागरिकों, जिनमें एक भारतीय नागरिक भी शामिल है, के प्रति संवेदना प्रकट की और घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की।
कैसे शुरू हुआ आंदोलन
गत सोमवार को सरकार द्वारा फेसबुक, एक्स (पूर्व ट्विटर), यूट्यूब और व्हाट्सएप सहित 26 सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को बंद करने का आदेश जारी किया गया। इस कदम के विरोध में युवाओं ने यूनिवर्सिटी परिसरों से प्रदर्शन शुरू किया।
प्रदर्शनकारियों ने वीपीएन के जरिये सोशल मीडिया पर लाइवस्ट्रीम और मीम्स के जरिये आंदोलन को फैलाया, जिससे पूरे देश में आक्रोश फैल गया। आंदोलन ने तेजी से हिंसक रूप ले लिया, और शाम होते-होते 10 जिलों में कर्फ्यू लगा दिया गया।
राजनीतिक हलचल और सरकार का पतन
सोमवार रात तक पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़पों में 19 लोगों की मौत हो चुकी थी। नेपाल पुलिस के अनुसार, अब तक हिंसा में कम से कम 51 लोगों की जान जा चुकी है, जिनमें एक भारतीय नागरिक भी शामिल है।
अंतरराष्ट्रीय दबाव और देश में बढ़ते जनाक्रोश के चलते प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली ने मंगलवार शाम 4 बजे इस्तीफा दे दिया। उनके इस्तीफे के बाद शुक्रवार रात को पूर्व मुख्य न्यायाधीश सुशीला कार्की ने नेपाल की पहली महिला प्रधानमंत्री के रूप में अंतरिम सरकार का कार्यभार संभाला, जिससे कई दिनों से जारी राजनीतिक अनिश्चितता पर विराम लग गया।

