काठमांडू: नेपाल में बीते दो दिनों में हालात तेजी से बिगड़े हैं। सोशल मीडिया बैन के खिलाफ शुरू हुआ युवा आंदोलन अब हिंसक रूप ले चुका है। अब तक की जानकारी के अनुसार, प्रदर्शन के दौरान 20 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है और करीब 300 लोग घायल हुए हैं।
इस भारी जनदबाव के बीच प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, ओली देश छोड़ने की तैयारी में हैं और दुबई जाने की योजना बना रहे हैं। बताया जा रहा है कि उन्होंने इलाज के बहाने देश से बाहर जाने के लिए सेना से मदद भी मांगी थी और हिमालय एयरलाइंस के एक निजी विमान को स्टैंडबाय पर रखा गया है।
सेना की भूमिका बढ़ने के संकेत
ओली के इस्तीफे के बाद यह आशंका जताई जा रही है कि देश में राजनीतिक शून्यता की स्थिति को देखते हुए सेना आगे आ सकती है। यह स्थिति काफी हद तक श्रीलंका और बांग्लादेश जैसी दिख रही है, जहां उग्र विरोध के बाद राष्ट्राध्यक्षों को देश छोड़ना पड़ा था।
मंत्रियों और सांसदों के भी इस्तीफे
ओली से पहले ही कई मंत्री और सांसद सरकार से इस्तीफा दे चुके हैं। गृहमंत्री रमेश लेखक, स्वास्थ्य मंत्री प्रदीप पौडेल और कृषि एवं पशुधन विकास मंत्री रामनाथ अधिकारी ने भी पद छोड़ दिए हैं। वहीं, प्रदर्शनकारियों ने कई मंत्रियों के आवासों और सरकारी इमारतों को आग के हवाले कर दिया है।
नेताओं के आवास बने हिंसा का केंद्र
प्रदर्शनकारियों का गुस्सा इतना भड़का कि प्रधानमंत्री ओली, राष्ट्रपति रामचंद्र पौडेल, सूचना एवं संचार मंत्री पृथ्वी सुब्बा गुरुंग और पूर्व प्रधानमंत्री पुष्प कमल दहल ‘प्रचंड’ के आवासों में आग लगा दी गई। राजधानी काठमांडू समेत कई जिलों में हालात बेहद तनावपूर्ण हैं।
नेपाल इस समय बड़े राजनीतिक संकट के दौर से गुजर रहा है। देश की युवा पीढ़ी द्वारा उठाई गई आवाज अब एक जनआंदोलन का रूप ले चुकी है, और आगे की स्थिति किस दिशा में जाएगी, यह कहना फिलहाल मुश्किल है।

