बीजिंग | चीन की राजधानी बीजिंग में मंगलवार को एक भव्य सैन्य परेड का आयोजन किया गया, जो द्वितीय विश्व युद्ध की समाप्ति की 80वीं वर्षगांठ के अवसर पर आयोजित की गई। इस परेड में चीन ने पहली बार कई अत्याधुनिक मिसाइलों, लड़ाकू विमानों, ड्रोन और अन्य रणनीतिक हथियारों का सार्वजनिक प्रदर्शन किया।
राष्ट्रपति शी जिनपिंग, जो कम्युनिस्ट पार्टी के सर्वोच्च नेता और केंद्रीय सैन्य आयोग के अध्यक्ष हैं, ने परेड की सलामी ली। उनके सामने कदमताल करते हुए हजारों सैनिक गुजरे और आसमान में दर्जनों युद्धक विमान व हेलिकॉप्टरों ने करतब दिखाए।
चीन के सैन्य अधिकारियों के अनुसार, परेड में दिखाए गए हथियार जमीन, समुद्र और आकाश से हमले करने की क्षमता रखते हैं और इनमें से अधिकतर को पहली बार जनता के सामने लाया गया है। यह प्रदर्शन चीन की बढ़ती सैन्य शक्ति और तकनीकी क्षमताओं का प्रतीक माना जा रहा है।
विदेशी नेताओं की भागीदारी
इस आयोजन में करीब दो दर्जन देशों के विदेशी नेता शामिल हुए। उत्तर कोरिया के नेता किम जोंग उन और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन इस मौके पर मौजूद रहे। ईरान और दक्षिण-पूर्व एशिया के कुछ देशों के नेता भी परेड में शामिल हुए। हालांकि अमेरिका, जापान, भारत और दक्षिण कोरिया जैसे प्रमुख देशों के नेता इसमें शामिल नहीं हुए। इंडोनेशिया के राष्ट्रपति ने देश में हो रहे विरोध प्रदर्शनों के चलते अपनी यात्रा रद्द कर दी।
अमेरिका और पड़ोसी देशों की चिंता
चीन की इस सैन्य परेड को देशवासियों में गर्व और आत्मविश्वास बढ़ाने की दिशा में एक कदम बताया गया है, वहीं दूसरी ओर उसकी बढ़ती सैन्य ताकत अमेरिका और एशिया-प्रशांत क्षेत्र के कई देशों के लिए चिंता का विषय भी बन गई है।
यह परेड 2019 के बाद चीन की पहली बड़ी सैन्य परेड है। पिछली बार यह परेड कम्युनिस्ट पार्टी की 70वीं वर्षगांठ के अवसर पर आयोजित की गई थी।

