Saturday, March 7, 2026
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शांति मिशन से पहले विदेशी फौज भेजी तो रूस करेगा जवाबी कार्रवाई: पुतिन

रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने शुक्रवार को स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि शांति समझौते से पहले किसी भी विदेशी सैनिक को यूक्रेन में तैनात किया गया, तो रूसी सेना उन्हें “वैध निशाना” मानेगी। यह बयान ऐसे समय पर आया है जब यूरोपीय देशों द्वारा यूक्रेन के लिए संभावित शांति मिशन की बात दोहराई जा रही है।

व्लादिवोस्तोक में आयोजित ईस्टर्न इकोनॉमिक फोरम के दौरान पुतिन ने कहा,

“अगर यूक्रेन में कोई विदेशी सैनिक आता है, खासकर अभी जब जंग जारी है, तो हम उसे वैध निशाना मानेंगे। रूस किसी अंतिम शांति समझौते का पालन करेगा, लेकिन जब तक युद्ध चल रहा है, किसी बाहरी सैनिक की मौजूदगी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।”

मैक्रों का प्रस्ताव और रूस की प्रतिक्रिया

पुतिन की यह प्रतिक्रिया सीधे तौर पर फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के उस बयान से जुड़ी है जिसमें उन्होंने कहा था कि 26 देशों ने यूक्रेन की सुरक्षा के लिए सैनिक भेजने की प्रतिबद्धता जताई है। मैक्रों ने हाल ही में पेरिस में हुई 35 देशों की एक बैठक के बाद कहा कि ये सैनिक “रिअश्योरेंस फोर्स” के रूप में युद्धविराम या शांति समझौते के बाद यूक्रेन में तैनात किए जाएंगे।

हालांकि, रूस ने इस प्रस्ताव पर तीखी आपत्ति जताई है। पुतिन ने दोहराया कि “नाटो या किसी भी प्रकार के अंतरराष्ट्रीय शांति बल की यूक्रेन में मौजूदगी रूस के लिए पूरी तरह अस्वीकार्य है।”

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि किसी भी संभावित शांति समझौते में रूस की सुरक्षा गारंटी सुनिश्चित होनी चाहिए। उनका कहना था कि रूस अपनी सुरक्षा को लेकर किसी भी प्रकार की चूक स्वीकार नहीं करेगा।

रूस-यूक्रेन युद्ध की पृष्ठभूमि

गौरतलब है कि रूस ने 24 फरवरी 2022 को यूक्रेन पर पूर्ण पैमाने पर सैन्य हमला किया था। इससे पहले 2014 में रूस ने क्रीमिया पर कब्जा कर लिया था। अब तक यह युद्ध साढ़े तीन वर्षों से चल रहा है, जिसमें हजारों जानें जा चुकी हैं और लाखों लोग विस्थापित हुए हैं। इस संघर्ष ने रूस और पश्चिमी देशों के बीच तनाव को चरम पर पहुंचा दिया है।

गंभीर संकेत और वैश्विक चिंता

पुतिन के ताजा बयान को सीधे तौर पर पश्चिमी देशों को चेतावनी के रूप में देखा जा रहा है। इससे यह स्पष्ट संकेत मिलता है कि रूस यूक्रेन में किसी भी विदेशी सैन्य हस्तक्षेप को युद्ध का विस्तार मान सकता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह स्थिति और बिगड़ती है, तो यह यूरोप ही नहीं, पूरी दुनिया के लिए एक गंभीर भू-राजनीतिक संकट बन सकती है।

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