Saturday, March 7, 2026
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नेपाल में राजशाही बहाली की साजिश का आरोप, सेना की भूमिका पर बढ़ी चिंता: बृहत नागरिक आंदोलन

काठमांडू। नेपाल में जारी राजनीतिक संकट के बीच नागरिक समाज संगठनों ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि देश में सेना की मध्यस्थता के जरिए राजशाही बहाल करने की साजिश चल रही है। बृहत नागरिक आंदोलन (BNA) नामक सामाजिक संगठन ने गुरुवार को एक प्रेस बयान जारी कर इस आशंका को सार्वजनिक किया।

BNA ने आरोप लगाया कि सरकार विरोधी प्रदर्शनों और युवाओं के आंदोलन के शहीदों की कुर्बानियों का इस्तेमाल करते हुए कुछ शक्तियाँ धर्मनिरपेक्षता, संघवाद और समावेशिता को खत्म कर राजशाही को पुनः स्थापित करना चाहती हैं। समूह ने इसे “पूरी तरह अस्वीकार्य” बताया और चेताया कि सेना की असंवैधानिक सक्रियता लोकतंत्र के लिए खतरा है।

सेना पर सवाल, अंतरिम सरकार की चर्चा जारी

नेपाल में के.पी. शर्मा ओली के इस्तीफे के बाद अंतरिम सरकार के गठन को लेकर चर्चा तेज हो गई है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, पूर्व मुख्य न्यायाधीश सुशीला कार्की को कार्यवाहक प्रधानमंत्री बनाए जाने की संभावना है। बताया जा रहा है कि जेनरेशन-जेड आंदोलन के युवा नेताओं ने राष्ट्रपति रामचंद्र पौडेल के साथ बैठक में कार्की के नाम का प्रस्ताव रखा है।

हालांकि गुरुवार रात तक चली बैठक में कोई अंतिम निर्णय नहीं हो सका। सूत्रों के अनुसार, सेना प्रमुख, राष्ट्रपति और आंदोलनकारी प्रतिनिधियों के बीच मतभेद अब भी कायम हैं।

विरोध प्रदर्शनों में हिंसा, 34 की मौत

नेपाल में हालिया विरोध प्रदर्शनों ने हिंसक रूप ले लिया है। सरकार द्वारा सोशल मीडिया पर प्रतिबंध लगाए जाने के बाद सोमवार को बड़ी संख्या में युवा प्रदर्शनकारी सड़कों पर उतर आए और संसद भवन में घुस गए। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने फायरिंग की, जिसमें 19 लोगों की मौत हो गई। अगले दिन भी प्रदर्शन जारी रहे और मरने वालों की संख्या 34 तक पहुंच गई।

इस बीच प्रधानमंत्री ओली ने इस्तीफा दे दिया, लेकिन लोगों का आक्रोश शांत नहीं हुआ। कई राजनेताओं के घर और कार्यालयों में तोड़फोड़ और आगजनी की घटनाएं सामने आई हैं।

बढ़ती राजशाही समर्थक गतिविधियाँ

नेपाल में 2008 में राजशाही की समाप्ति के बाद यह पहली बार है जब इतने बड़े स्तर पर राजशाही बहाली की मांग सामने आई है। हाल के महीनों में पूर्व राजा ज्ञानेंद्र शाह की सक्रियता भी बढ़ी है। राजनीतिक अस्थिरता और नेतृत्व संकट के बीच कुछ वर्ग राजशाही को विकल्प के रूप में देख रहे हैं।

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