हल्द्वानी। तलवारबाजी के एशियन कैडेट कप में बतौर मुख्य अतिथि पहुंचे उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि यह खेल भारत की प्राचीन परंपरा का अहम हिस्सा रहा है। उन्होंने कहा कि गुरुकुल प्रणाली में श्रीराम और उनके भाइयों ने न केवल वेद-शास्त्र सीखे, बल्कि युद्ध कौशल, विशेष रूप से तलवारबाजी का भी गहन अभ्यास किया।
मुख्यमंत्री ने कहा, “फेंसिंग यानी तलवारबाजी की कला को भारत में वो प्रोत्साहन नहीं मिला, जो मिलना चाहिए था। लेकिन बीते कुछ वर्षों में इसमें सकारात्मक परिवर्तन देखने को मिल रहे हैं।”
धामी ने देश के विभिन्न हिस्सों में प्राचीन युद्ध कलाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि “गुरु गोबिंद सिंह, महाराणा प्रताप, पंजाब की गतका कला और केरल की कलारिपयट्टू जैसी परंपराएं इस बात का प्रमाण हैं कि भारत में तलवार का अपना गौरवशाली इतिहास रहा है। अब समय आ गया है कि इसे एक आधुनिक खेल के रूप में भी बढ़ावा दिया जाए।”
उन्होंने आश्वस्त किया कि उत्तराखंड में भी तलवारबाजी को बढ़ावा देने के लिए ठोस कदम उठाए जाएंगे, ताकि यहां के युवा इस क्षेत्र में भी राज्य और देश का नाम रोशन कर सकें।
कार्यक्रम में प्रदेश भर से आए युवा फेंसर्स ने अपने शानदार प्रदर्शन से सभी का मन मोह लिया। आयोजन समिति ने मुख्यमंत्री का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उनके प्रोत्साहन से इस खेल को नई ऊर्जा मिलेगी।

