Sunday, March 8, 2026
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क्रिकेट की शुरुआत करते ही कमल में डायग्ननोस हुआ ब्लड कैंसर, एक साल बेड पर रहे, लौटे तो बन गए उत्तराखंड के ‘युवराज’

हल्द्वानी : युवराज सिंह न सिर्फ स्पोट्र्स मैन के लिए बल्कि कैंसर पीड़ित हर मरीज के लिए प्रेरणा हैं। जिस तरह से उन्होंने सालों तक चौके-छक्के जड़कर क्रिकेट प्रेमियों का दिल जीता वैसे ही, वैसे ही जिंदगी की पिच पर कैंसर से डटकर लड़े और एक बार फिर से पूरे फार्म में मैदान में लौटे। उत्तराखंड के युवराज हैं कमल कन्याल। जिन्होंने क्रिकेट के अलावा अपने जीवन में कुछ और नहीं सोचा। शुरुआती दिनों में जब बल्ला थामा तो लोग उनके हुनर के कायल हो गए। कोच और क्रिकेट के पारखियों ने कहा कि कमल एक दिन इंडियन टीम का हिस्सा बनेगा। लेकिन शुरुआत में ही एक साल मैच खेलने के बाद कन्याल परिवार को बड़ा सदमा लगा। कमल में सेकेंड स्टेज का ब्लड कैंसर डायग्नोस हुआ। लगा कि अब सबकुछ खत्म हो जाएगा। लेकिन कमल के साथ पूरे परिवार ने हौसला रखा। छह महीने तक नाेएडा में इलाज चला और छह महीने तक घर पर परिवार वालों ने देखरेख की। जिसका प्रतिफल हुआ ये हुआ कि वह पूरी तरह से फिट होकर मैदान में वापस लौटे। लौटे तो फिर कभी वापस मुड़कर नहीं देखा। रणजी और विजय हजारे ट्राफी में शतक लगाकर खुद को साबित किया।

नोएडा के आर्मी अस्पताल में चला इलाज

उत्तराखंड के नैनीताल जिले के गौलापार निवासी तीन भाई-बहन में सबसे छोटे कमल कन्याल ने 2013-14 में क्रिकेट खेलना शुरू किया। बायें हाथ के बल्लेबाज की उम्र महज 14 साल थी। इसके एक साल बाद उनकी तबीयत खराब रहने लगी। शुरुआती दिनों में कमल के स्वजनों को लगा कि पढ़ाई के साथ क्रिकेट का अतिरिक्त बोझ होने से उन्हें परेशानी हो रही है। लेकिन, समस्या बढ़ने लगी तो 2015 में पिता उमेश कन्याल उन्हें चिकित्सक के पास ले गए। जांच में पता चला कि कमल को ब्लड कैंसर है, जो दूसरी स्टेज में था। पापा चूंकी इंडियन आर्मी थे इसलिए नोएडा के आर्मी अस्पताल में इलाज शुरू हुआ। आर्मी हास्पिटल होने के कारण पैसों की चिंता नहीं थी। करीब छह महीने तक एडमिट रहने के बाद छह महीने घर बेड पर रहे। स्वजनों ने खूद देखरेख की। जीवन की जंग में विजेता बनकर लौटे कमल ने शानदार पारियां खेलीं।

रणजी ट्राफी के लिए कैंप में पसीना महा रहे कमल 

बायें हाथ के बल्लेबाज कमल कैंसर से जंग के चलते दो साल तक मैदान से दूर रहे। वर्ष 2018 में पूरी तरह स्वस्थ होने के बाद वह दोबारा खेलने उतरे। इसके बाद 2019 में उत्तराखंड की तरफ से कूच बिहार ट्रॉफी में कमल ने दोहरा शतक लगाकर सभी का ध्यान अपनी ओर खींचा। इस टूर्नामेंट के नौ मैच में 805 रन बनाकर वह बीसीसीआइ की अंडर-19 रैंकिंग में पांचवें पायदान पर रहे। 2019-20 में उन्होंने रणजी ट्रॉफी में आखिरी मैच खेला और महाराष्ट्र के खिलाफ शानदार शतक ठोंका और वाहवाही लूटी। विजय हजारे ट्राफी में सिक्किम के खिलाफ 120 रन बनाए। वहीं क्रिकेट एसोसिएशन ऑफ उत्तराखंड ने कमल को स्कॉलरशिप के लिए चयनित किया। इस समय वे देहरादून में 16 फरवरी से शुरू होने वाले रणजी ट्राफी के लिए कैंप में पसीना भहा रहे रहे हैं। रणजी मैच में देशभर की कुछ 36 टीमें हिस्सा ले रही हैं।

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