Sunday, March 8, 2026
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मुकदमों के बोझ को कम करने के लिए उत्तराखंड हाई कोर्ट के सख्त निर्देश, अब पीठासीन अधिकारियों की होगी जवाबदेही

नैनीताल। जिलों में संचालित अदालतों पर बढ़ते मुकदमों के बोझ को कम करने के लिए हाई कोर्ट ने सख्त दिशा निर्देश जारी किए हैं। जिला न्यायाधीशों को जारी सर्कुलर में कहा गया है कि कि पीठासीन अधिकारियों को खुद मुकदमे की मॉनिटरिंग करनी होगी। अब किसी आरोपित के बयान कंप्यूटर में ही दर्ज होंगे। यह सुनिश्चित करना होगा कि समयाभाव में किसी मामले को स्थगित ना किया जाय। कार्यालय से अभिलेख तलब करने की निगरानी भी पीठासीन अधिकारी करेंगे।

हाई कोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल अनुज कुमार संगल की ओर से निचली अदालतों को यह सर्कुलर जारी किया गया है। इसमें तमाम दिशा-निर्देश शामिल हैं। आदेश के अनुसार साक्ष्य की रिकॉर्डिंग बिना किसी हस्तक्षेप के पीठासीन अधिकारी की ओर से किया जाना चाहिए। किसी भी स्थिति में दो मामले एक साथ नहीं उठाए जाने चाहिए। न्यायालय में प्रस्तुत आवेदन, जिसमें कार्यालय से अभिलेख तलब किया जाता है, की निगरानी पीठासीन अधिकारी करेंगे।

पीठासीन अधिकारियों की बढ़ी जिम्मेदारी
हाई कोर्ट के जारी सर्कुलर के अनुसार पक्षकार को रीडर या कोर्ट क्लर्क से संपर्क नहीं करना चाहिए। जमानत बांड पर उसी दिन कार्रवाई हो और रिहाई आदेश उसी दिन जेल में पहुंच जाए। इसे रीडर, कोर्ट क्लर्क या कोर्ट मोहर्रिर के पास नहीं छोड़ा जाना चाहिए। यह कार्यशैली भ्रष्टाचार को बढ़ावा देती है। पीठासीन अधिकारी को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि रिहाई आदेश सही है। यह भी अपेक्षा की गई है कि एक आपराधिक मुकदमे में आरोप तय करने का कार्य आशुलिपिक-अभियोजक पर नहीं छोड़ा जाना चाहिए। इसे पीठासीन अधिकारी खुद निर्देशित करें।

पूछे जाने वाले सवाल से लेकर ये काम करें अधिकारी
अभियुक्त से पूछे जाने वाले प्रश्न भी पीठासीन अधिकारी स्वयं तैयार करें। आरोपित को कंप्यूटर पर फैसला सुनाया जाना चाहिए। किसी भी स्थिति में बयान दर्ज करने व तारीख तय करने का काम स्टेनोग्राफर-रीडर के हाथ में नहीं छोड़ा जाना चाहिए। न्यायिक अधिकारियों के लिए उपलब्ध जस्ट आईएस ऐप का अनिवार्य रूप से उपयोग किया जाना चाहिए। इस ऐप में डैशबोर्ड, वाद सूची, वर्षवार ब्रेकअप, मामलों का चरण आदि शामिल हैं। ऐप में महत्वपूर्ण मामलों की एक सूची भी रखी जा सकती है, जिन्हें विभिन्न कारणों से प्राथमिकता दी जानी है।

हाई कोर्ट ने यह भी की है अपेक्षा

  • न्यायालय में किए जाने वाले प्रत्येक कार्य के लिए एक समय-निर्धारित होना चाहिए।
  • दलीलों को बिना ज्यादा रुकावट के, निरंतरता से सुना जाना चाहिए, निर्णय डिलीवरी के लिए निर्धारित तिथि पर सुनाया जाना चाहिए।
  • पीठासीन अधिकारी को पार्टियों की दलीलों की जांच करनी चाहिए।
  • आरोप तय करने से पहले आरोप पत्र की जांच की जानी चाहिए।
  • आपराधिक मुकदमे में आपराधिक प्रक्रिया संहिता का अनुपालन हो।
  • केस डायरी का रखरखाव पीठासीन अधिकारी करेंगे।
  • समयाभाव में किसी मामले को स्थगित न किया जा सके और काम के घंटों का पूरा उपयोग हो सके।
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