Sunday, March 8, 2026
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शेरवुड कॉलेज प्रकरण: हाईकोर्ट ने दिए निचली अदालत का फैसला आने तक यथास्थिति बनाए रखने के आदेश

उतराखंड हाईकोर्ट ने नैनीताल के प्रतिष्ठित शेरवुड कॉलेज के प्रबंधन व स्वामित्व विवाद में सभी पक्षकारों से निचली अदालत का फैसला आने तक यथास्थिति बनाने के आदेश  दिए हैं। फैसले से शेरवुड के प्रधानाचार्य अमनदीप संधू को बड़ी राहत मिली है।

अब वे मामले के निस्तारण तक प्रधानाचार्य बने रह सकेंगे। संधू का कहना है कि वे शुरू से ही यही बात रखते आए हैं, आज उनकी मांग की कोर्ट से भी पुष्टि हो गई है।  मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति लोकपाल सिंह की एकलपीठ में हुई थी और निर्णय सुरक्षित रख लिया गया था। अब यह फैसला सुनाया गया है।

मामले के अनुसार शेरवुड डायसिस कॉलेज सोसायटी के चेयरमैन, डायसिस ऑफ आगरा के बिशप और चर्च ऑफ नार्थ इंडिया के चेयरमैन डा. पीपी हाबिल के पॉवर ऑफ अटॉर्नी धारक आशीष पॉल हाबिल ने हाईकोर्ट में 25 मई 2018 के आदेश को संशोधित करने के लिए आवेदन किया था। उनका कहना था कि इस मामले में सिविल जज-सीनियर डिवीजन नैनीताल की अदालत में सिविल मामला चल रहा है और कॉलेज प्रबंधन का विवाद अभी भी विचाराधीन है।

जिसमें शेरवुड डायसिस सोसाइटी कॉलेज नाम से डिप्टी रजिस्ट्रार चिट फंड कार्यालय में पंजीयन विवाद भी शामिल है। इस याचिका में डिप्टी रजिस्ट्रार चिट फंड हल्द्वानी के अलावा अमनदीप संधू को प्रतिवादी बनाया गया है। अन्य प्रतिवादियों में शेरवुड कॉलेज सोसाइटी नैनीताल जिसके सचिव अमनदीप संधू हैं, जॉन ऑगस्टीन व डायसिस ऑफ लखनऊ, चर्च ऑफ इंडिया, पाकिस्तान, बर्मा, सिलोन के चेयरमेन  के अलावा लखनऊ के विजय मोंटेंडे शामिल हैं । इन सभी पक्षकारों का शेरवुड कॉलेज पर दावा है और यह विवाद निचली अदालत में लंबित है।

उल्लेखनीय है कि इससे पूर्व सुप्रीम कोर्ट ने उतराखंड हाईकोर्ट के उस आदेश को रद्द कर दिया था जिसमें हाईकोर्ट ने आगरा डायसिस की ओर से शेरवुड कॉलेज का अंतरिम प्रिंसिपल पीटर एमैन्युएल को बनाने के बाद उन्हें पुलिस सुरक्षा देने के आदेश दिए थे। लेकिन इस याचिका में अमनदीप संधू को पक्षकार नहीं बनाया था। जिस कारण सुप्रीम कोर्ट ने सभी पक्षों को सुनने का आदेश हाईकोर्ट को दिया था ।

हाईकोर्ट के 27 जनवरी को जारी आदेश पर शेरवुड कॉलेज के प्रिंसिपल अमनदीप संधू ने खुशी व्यक्त करते हुए कहा कि अब निचली अदालत में सभी पक्षकारों की सुनवाई हो सकेगी। उन्होंने कहा कि वह शुरू से कह रहे थे कि हाईकोर्ट के 2014 के आदेश के बाद आगरा डायसिस को बैठक कर प्रधानाध्यापक को बदलने का अधिकार ही नहीं था। अब हाईकोर्ट के ताजा निर्णय से उनकी बात की पुष्टि हो गई है। हाईकोर्ट ने अपने आदेश में विवाद के चलते शेरवुड कॉलेज के विद्यार्थियों की पढ़ाई में किसी तरह का व्यवधान न होने देने के निर्देश भी दिए हैं।

 

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