Sunday, March 8, 2026
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एनटीसीए अब 2022 में अंतरराष्ट्रीय बाघ दिवस पर जारी करेगा बाघों की गणना के आंकड़े

2019 में बाघों की गणना के आंकड़े जारी करने में काफी समय लग गया था। पर इस बार लेटलतीफी नहीं की जाएगी। एनटीसीए अब साल 2022 में अंतरराष्ट्रीय बाघ दिवस पर बाघों की गणना का रिजल्ट जारी करेगा। यह बात एनटीसीए के डीआईजी सुरेंद्र मेहरा ने शुक्रवार को रामनगर में कही।

एनटीसीए (राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण) के डीआईजी कॉर्बेट टाइगर रिजर्व के ढेला में बन रहे रेस्क्यू सेंटर का निरीक्षण करने पहुंचे थे। ढेला में रेस्क्यू सेंटर का निर्माण कार्य अब अंतिम दौर में है। उम्मीद है कि जल्द ही प्रदेश के सीएम रेस्क्यू सेंटर का उद्घाटन करने पहुंचेंगे। एनटीसीए के डीआईजी सुरेंद्र मेहरा ने बताया कि साल 2018 में देशभर में बाघों की गणना हुई थी।

वर्ष 2019 में 29 जुलाई को राज्यों और 2020 में टाइगर रिजर्व में मौजूद बाघों के आंकड़े जारी किए गए। इस पूरी प्रक्रिया में तीन साल लग गए थे। अब वर्ष 2022 में अखिल भारतीय स्तर पर होने वाली बाघों की गणना का रिजल्ट समय पर जारी किया जाएगा। 2022 में 29 जुलाई को अंतरराष्ट्रीय बाघ दिवस के दिन राज्यों और टाइगर रिजर्व में बाघों की संख्या का आंकड़ा एकसाथ घोषित किया जाएगा। इस दौरान पार्क निदेशक राहुल, पार्क वार्डन आरके तिवारी आदि मौजूद रहे।

तेंदुओं का आंकड़ा पता नहीं
डीआईजी मेहरा ने देश में कुछ समय पहले जारी तेंदुओं के आंकड़ों पर कहा कि ये आंकड़े टाइगर रिजर्व में लगे कैमरा ट्रैप के आधार पर जारी किए हैं। पर्वतीय और मैदानी इलाकों में मौजूद तेंदुओं का आंकड़ा अब तक नहीं है। पर्वतीय और मैदानी इलाकों में तेंदुओं की गणना करना मुश्किल है।

आबादी के करीब बाघों की आवाजाही पर चिंता
डीआईजी सुरेंद्र मेहरा ने आबादी के नजदीक बाघों की आवाजाही पर चिंता जताई। टाइगर रिजर्व में बाघों की संख्या बढ़ना राहत भरा है पर मानव वन्यजीव संघर्ष चिंता भी बढ़ा रहा है। एनटीसीए उन टाइगर रिजर्व में बाघों को शिफ्ट करने पर विचार कर रहा है, जहां बाघों की संख्या कम है या फिर नहीं है। इससे बाघों को वास करने में कोई परेशानी नहीं होगी और वह आबादी के नजदीक भी नहीं जाएंगे।

स्थानीय लोगों के हित में कंडी मार्ग पर संचालित हुई बस सेवा
कंडी मार्ग पर स्थानीय लोगों के हित में बस सेवा शुरू की गई। फिलहाल कंडी मार्ग पर एक ही बस संचालित हो रही है। स्थानीय लोगों के हित में कॉर्बेट प्रशासन ने यह फैसला लिया है। इससे वन्यजीवों के जीवन पर कोई असर नहीं पड़ेगा।

 

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