नैनीताल: उत्तराखंड हाई कोर्ट ने मछलियों पर क्रूरता का हवाला देते हुए एंगलिंग (कांटे से मछली पकड़कर वापस छोड़ना) पर प्रतिबंध लगाने की मांग वाली याचिका पर केंद्र और राज्य सरकार को नोटिस जारी किया है।
यह जनहित याचिका जै राज, उत्तराखंड के पूर्व प्रमुख वन बल प्रमुख (HoFF), ने दायर की है। अदालत अब इस मामले की अगली सुनवाई 11 दिसंबर को करेगी।
जै राज ने कोर्ट में कहा कि: एंगलिंग में मछलियों को कांटे से पकड़कर पानी से बाहर खींचा जाता है फिर कांटा निकालकर उन्हें वापस पानी में छोड़ दिया जाता है इससे मछलियों को “गंभीर और अनावश्यक क्रूरता” झेलनी पड़ती है
उन्होंने बताया कि 2018 में HoFF रहते हुए उन्होंने आरक्षित और संरक्षित वनों में एंगलिंग पर रोक लगा दी थी, लेकिन 2020 में सेवानिवृत्ति के बाद राज्य सरकार ने इस प्रतिबंध को हटा दिया।
याचिकाकर्ता ने कहा कि: प्रतिबंध हटने के बाद एंगलिंग काफी बढ़ गई है कई पंचायतें भी लाइसेंस जारी कर रही हैं। यह केंद्र के पशु क्रूरता निवारण कानून का उल्लंघन है, उन्होंने मांग की कि न सिर्फ उत्तराखंड में, बल्कि पूरे देश में एंगलिंग पर प्रतिबंध लगाया जाए।
2018 में उत्तराखंड देश का पहला राज्य बना था जिसने एंगलिंग पर प्रतिबंध लगाया था, क्योंकि इसमें मछलियों को चोट पहुँचने का खतरा रहता है, खासकर संरक्षित क्षेत्रों और टाइगर रिज़र्व में।

