Sunday, March 8, 2026
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मौसम की मार झेल चुके किसानों का धान खरीदने से इन्कार, गौलापार मंडी क्रय केंद्र से लौटा दी 25 ट्रालियां

हल्द्वानी : किसान पहले ही आपदा की मार से परेशान थे। उम्मीदों की फसल बारिश में धुल चुकी थी। खेत में बचे हुए धान को समेटने के बाद सोमवार को बेचने निकले थे, मगर सरकारी क्रय केंद्रों ने धान की गुणवत्ता घटिया बताकर इसे खरीदने से इन्कार कर दिया। इसके बाद गुस्साए 100 से अधिक किसान मंडी स्थित खाद्य नागरिक आपूर्ति विभाग के खरीद केंद्र पहुंच गए। यहां भी उन्हें निराशा मिली। दिन भर भटकने के बाद कटौती पर निजी मिलर को धान बेचना पड़ा।

खेतों में धान की फसल लहलहा रही थी। ठीक उसी समय तेज बारिश की वजह से धान की फसल तहस-नहस हो गई। इसके चलते धान के दाने काले पड़ गए। इस फसल को समेटने के बाद रविवार को गौलापार के 100 से अधिक किसान 25 से अधिक ट्रालियों में करीब 625 क्विंटल धान लेकर गौलापार स्थित धान क्रय केंद्र पहुंच गए। वहां धान की गुणवत्ता खराब बताते हुए खरीद से इन्कार कर दिया गया। पहले ही मौसम की मार झेल चुके किसान इस तरह का जवाब सुन आक्रोशित हो गए और ट्रालियां लेकर मंडी स्थित खाद्य नागरिक आपूर्ति विभाग के खरीद केंद्र पहुंच गए। यहां भी किसानों को निराशा हाथ लगी। वरिष्ठ विपणन निरीक्षक दीक्षा मिश्रा चौबे ने किसानों को समझाने का प्रयास किया लेकिन वे नहीं माने। इसके बाद आरएफसी हरबीर सिंह मौके पर पहुंचे।

निजी राइस मिलर्स के वहां भटकते रहे किसान

आरएफसी ने धान राइस मिलर्स में बेचने की व्यवस्था की। पहले एक क्विंटल में पांच किलो की कटौती कर धान खरीदने पर सहमति बनी थी। बाद में राइस मिलर्स सात किलो कटौती पर खरीदने के लिए कहने लगे। फिर किसान मंडी लौटे और हंगामा काटा। इसके बाद फिर आरएफसी ने बात की और मिलर्स मान गए। दिन भर छह घंटे भटकते हुए किसानों ने फिर पांच किलो कटौती पर धान बेचा।

एमएसपी पर धान खरीद का कानून लागू होना चाहिए। कम कीमत देने वालों पर जुर्माना लगाया जाए। हमें दिन भर धान बेचने के लिए भटकना पड़ा। -त्रिलोक सिंह मेहरा, धान किसान, कुंवरपुर

धान खरीद के लिए 10 दिनों से परेशान किया जा रहा है। आरएफसी ने पांच किलो कटौती तय की, इसके बाद भी मिलर सात किलो काट रहा है। -शंकर दत्त कफल्टिया, धान किसान, रतनपुर

बारिश से हुए नुकसान के बाद अब खरीद के लिए परेशानी उठानी पड़ रही है। किसान क्रय केंद्र होने के बाद भटकने को मजबूर है। कोई सुधलेवा नहीं है। -उमेश चंद्र, धान किसान, बांसखेड़ा

सात एकड़ धान बारिश में भीग गया, जिससे बड़े स्तर पर नुकसान हुआ है। गांव में व्यापारी 800 रुपये में धान बेचने की बात कह रहे हैं। -भारत सिंह, धान किसान, जगतपुर

बारिश में भीगा हुआ धान मानक के अनुसार न होने के कारण नहीं खरीदा जा सका। धान सीधे राइस मिलों में भेजा है, किसान को खाली हाथ नहीं लौटना होगा। -दीक्षा मिश्रा चौबे, विपणन निरीक्षक, हल्द्वानी

प्रति क्विंटल पर पांच किलो धान की कटौती

कुमाऊं के आरएफसी हरबीर सिंह ने बताया कि बारिश से काले पड़े धान को राइस मिलर खरीद रहे हैं। जहां समझौते के तहत प्रति क्विंटल पर पांच किलो धान की कटौती की जा रही है। किसानों के साथ अहित नहीं होने दिया जाएगा।

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