Sunday, March 8, 2026
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हाईकोर्ट ने सस्ती बिजली मामले में ऊर्जा निगम के एमडी से मांगा जवाब

Nainital High court seeks reply from MD of Energy Corporation in cheap electricity case
नैनीताल। हाईकोर्ट ने ऊर्जा निगम में कार्यरत अधिकारियों और कर्मचारियों को पावर कार्पोरेशन की ओर से सस्ती दरों पर बिजली देने और इसका सीधे बोझ आम जनता पर डालने के मामले में दायर जनहित याचिका पर सुनवाई के बाद पावर कार्पोरेशन के एमडी को दो सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं।

कोर्ट ने एमडी से पूछा है कि अभी तक कितने कर्मचारियों के घरों में मीटर लग चुके हैं और कर्मियों वर्ष भर में कितनी यूनिट बिजली किस दर से दी जाती है। कोर्ट ने कहा है कि 2018-19 में कितना राजस्व इनसे वसूला गया और निगम को कितना घाटा हुआ। कोर्ट ने मामले में स्पष्ट जवाब नहीं देने पर नाराजगी भी जताई। पक्षों की सुनवाई के बाद हाईकोर्ट की खंडपीठ ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 10 फरवरी की तिथि नियत की।

सुनवाई के दौरान कार्पोरेशन की ओर से कोर्ट को बताया गया कि उन्होंने बोर्ड मीटिंग में कर्मचारियों को दी जाने वाली सस्ती बिजली का प्रस्ताव रखा है। जिसमें चतुर्थ श्रेणी कर्मी को आठ हजार यूनिट, तृतीय श्रेणी को दस हजार, प्रथम श्रेणी को ग्यारह और बारह हजार यूनिट बिजली निशुल्क देने का प्रस्ताव शामिल है। इससे अधिक खर्च पर पचास प्रतिशत के हिसाब से भुगतान करेंगे।

इस पर कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा है कि देश के सभी न्यायाधीशों को दस हजार यूनिट बिजली साल की दी जाती है और इससे अधिक खर्च करने पर उनसे प्रचलित बिजली की दर से वसूला जाता है। याचिकाकर्ता के अधिवक्ता ने कोर्ट को बताया कि हिमाचल प्रदेश ऊर्जा प्रदेश नहीं होते हुए भी वहां बिजली 1 रुपया प्रति यूनिट है जबकि उत्तराखंड ऊर्जा प्रदेश होते हुए भी यहां आम जनता से साढ़े चार रुपया यूनिट के हिसाब से वसूला जाता है। कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 10 फरवरी की तिथि नियत की गई है।

मुख्य न्यायाधीश रमेश रंगनाथान एवं न्यायमूर्ति आलोक कुमार वर्मा की खंडपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। मामले के अनुसार देहरादून के आरटीआई क्लब ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर कर कहा था कि सरकार ऊर्जा निगम में तैनात अधिकारियों से एक माह का बिल मात्र 400 से 500 रुपए एवं अन्य कर्मचारियों से 100 रुपए ले रही है।

जबकि इनका बिल लाखों में आता है। इसका बोझ सीधे जनता पर पड़ रहा है। याचिकाकर्ता का कहना था कि प्रदेश में कई अधिकारियों के घर बिजली के मीटर तक नहीं लगे हैं और जो लगे भी हैं वह खराब स्थिति में हैं। कार्पोरेशन ने वर्तमान कर्मचारियों के अलावा सेवानिवृत और आश्रितों को भी बिजली मुफ्त में दी है।

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