हल्द्वानी रेलवे की 29 एकड़ जमीन पर हुए अतिक्रमण के मामले में आज (मंगलवार) सुप्रीम कोर्ट में महत्वपूर्ण सुनवाई होनी है। कोर्ट के फैसले पर 4365 अतिक्रमणकारियों और उनके हजारों परिवारों की किस्मत टिकी हुई है। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस और प्रशासन ने पूरी तैयारी कर ली है।
2007 – पहला बड़ा कदम: याचिकाकर्ता रविशंकर जोशी के अनुसार, बनभूलपुरा और गफूरबस्ती क्षेत्र में रेलवे भूमि से अतिक्रमण हटाने के लिए 2007 में हाईकोर्ट ने आदेश दिए थे। इसके बाद प्रशासन ने 2400 वर्गमीटर भूमि अतिक्रमणमुक्त कराई थी।
2013 – अवैध खनन से शुरू होकर मामला फिर रेलवे भूमि पर पहुंचा: जोशी ने गौला नदी में हो रहे अवैध खनन और गौला पुल क्षतिग्रस्त होने के संबंध में हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की। सुनवाई के दौरान रेलवे भूमि का अतिक्रमण मुद्दा फिर सामने आया। 2016 – हाईकोर्ट का निर्देश, 10 सप्ताह में अतिक्रमण हटाओ . 9 नवंबर 2016 को हाईकोर्ट ने याचिका निस्तारित करते हुए रेलवे को 10 सप्ताह में सभी अतिक्रमण हटाने का आदेश दिया।
इसके बाद प्रदेश सरकार व अतिक्रमणकारियों ने हाईकोर्ट में शपथ पत्र देकर जमीन को नजूल भूमि बताया, लेकिन 10 जनवरी 2017 को कोर्ट ने इसे खारिज कर दिया।
2017 – सुप्रीम कोर्ट की एंट्री : इसके खिलाफ कई याचिकाएं सुप्रीम कोर्ट में दायर हुईं। सुप्रीम कोर्ट ने अतिक्रमणकारियों और सरकार को निर्देश दिया कि वे अपने व्यक्तिगत आवेदन 13 फरवरी 2017 तक हाईकोर्ट में दें। 6 मार्च 2017 को हाईकोर्ट ने रेलवे को अप्राधिकृत अधिभोगियों की बेदखली अधिनियम 1971 के तहत कार्रवाई का आदेश दिया, लेकिन कोई बड़ी कार्रवाई नहीं हुई। इस पर जोशी ने अवमानना याचिका दायर की, पर कब्जे नहीं हटे।
2022 – नए सिरे से जनहित याचिका और नए आदेश, 21 मार्च 2022 को जोशी ने एक और जनहित याचिका दायर की, आरोप लगाया कि रेलवे अपनी भूमि से अतिक्रमण हटाने में विफल रहा है। 18 मई 2022 को हाईकोर्ट ने प्रभावित लोगों को अपना पक्ष रखने को कहा, लेकिन वे अपने दावे साबित नहीं कर सके। 20 दिसंबर 2022 को हाईकोर्ट ने रेलवे को अतिक्रमणकारियों को नोटिस देकर कब्जा हटाने के निर्देश दिए। इसके बाद मामला सुप्रीम कोर्ट में पहुंच गया। और आज इस पर सुनवाई होने जा रही है।
क्यों अहम है आज का दिन
- रेलवे का दावा है कि हल्द्वानी में उसकी 29 एकड़ भूमि पर 4365 परिवार अवैध रूप से कब्जा किए बैठे हैं।
- कोर्ट का फैसला हजारों लोगों के भविष्य को सीधे प्रभावित करेगा।
- प्रशासन हाई अलर्ट पर है और संभावित स्थिति से निपटने की तैयारी पूरी कर चुका है। फैसले का इंतजार अब पूरे हल्द्वानी को है।

