उत्तराखंड हाईकोर्ट ने इस बात पर गहरी चिंता जताई है कि बड़ी संख्या में किशोर अवस्था में युवक युवातियां विवाह कर रहे हैं और सुरक्षा के लिए हाईकोर्ट आ रहे हैं। पूर्व में सुनवाई में कोर्ट ने मामले में सचिव बाल कल्याण चंद्रेश यादव को कोर्ट में तलब किया था जो आज कोर्ट में पेश हुए। कोर्ट ने चंद्रेश कुमार को एक इस संबंध में लोगों को जागरूक करने व पॉक्सो अधिनियम की गंभीरता समझाने के लिए दो सप्ताह में योजना बना कर कोर्ट में प्रस्तुत करने तथा इन कार्यक्रमों को विभिन्न सम्बंधित विभागों के माध्यम से संवेदनशील क्षेत्रों में नाटकों, लघु फिल्मों जैसे तरीकों के माध्यम से आयोजित करने के निर्देश दिए। मामले की सुनवाई दो सप्ताह के बाद अदालत के समक्ष योजना रखे जाने पर होगी।
मुख्य न्यायाधीश जी नरेंदर और न्यायमूर्ति आलोक मेहरा की खंडपीठ ने ऐसे एक प्रकरण पर सुनवाई के दौरान कहा कि यह प्रवृत्ति चिंताजनक है और इस पर ध्यान दिया जाना आवश्यक है।।
कोर्ट ने सचिव शिक्षा चंद्रेश कुमार को एक इस संबंध में लोगों को जागरूक करने खासकर पेरेंट्स को पॉक्सो अधिनियम की गंभीरता समझाने के लिए दो सप्ताह में योजना बना कर कोर्ट में प्रस्तुत करने के निर्देश दिए जिससे वे बच्चों का मार्गदर्शन कर सकें। कोर्ट ने निर्देश दिए कि इन कार्यक्रमों को आक्रामक रूप से शिक्षा विभाग, ग्रामीण विकास विभागों, आंगनवाड़ी, स्थानीय प्रशासन और पैरालीगल स्वयंसेवकों के माध्यम से संवेदनशील क्षेत्रों में आयोजित किया जाए। युवा वयस्कों को संवेदनशील बनाने के लिए नाटकों, लघु फिल्मों जैसे तरीकों का उपयोग भी किया जाए।

