नैनीताल। उत्तराखंड हाई कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण आदेश पारित करते हुए स्वामी कैलाशानंद मिशन ट्रस्ट की संपूर्ण संपत्ति—धर्मशाला, मंदिर, गौशाला और अन्य चल-अचल संपत्तियों—को विवाद सुलझने तक श्री बदरी-केदारनाथ मंदिर समिति (बीकेटीसी) के सुपुर्द करने के निर्देश जारी किए हैं। यह आदेश ट्रस्ट की संपत्ति और अधिकारों को लेकर वर्ष 2014 से देहरादून जिला न्यायालय में लंबित विवाद को ध्यान में रखते हुए दिया गया है।
लक्ष्मण झूला के निकट स्थित ट्रस्ट की संपत्ति पर पिछले कुछ वर्षों में अवैध कब्जों और खुरदबुर्द की शिकायतें सामने आने के बाद मामला गंभीर हो गया था। न्यायमूर्ति राकेश थपलियाल की एकलपीठ ने सभी पक्षों को सुनने और प्रस्तुत साक्ष्यों पर विचार करने के बाद यह फैसला सुनाया। कोर्ट ने माना कि बीकेटीसी एक वैधानिक निकाय है और रिसीवर की जिम्मेदारी संभालने के लिए सबसे उपयुक्त संस्था है।
बीकेटीसी को मिले ये अधिकार
कोर्ट के आदेश के बाद अब से बीकेटीसी को—
- कैलाशानंद मिशन ट्रस्ट का प्रतिनिधित्व किसी भी न्यायालय, सरकारी विभाग या प्राधिकरण के समक्ष करने का अधिकार होगा।
- ट्रस्ट की संपत्तियों पर अपना साइनबोर्ड लगाने का भी अधिकार प्राप्त होगा।
- ट्रस्ट का धन और संपत्तियां केवल जनहित और गैर-लाभकारी गतिविधियों के लिए ही उपयोग की जा सकेंगी।
- जरूरत पड़ने पर जिला प्रशासन बीकेटीसी को पूर्ण सहयोग प्रदान करेगा।
वर्तमान रिसीवर को रिकॉर्ड सौंपने का निर्देश
कोर्ट ने वर्तमान रिसीवर राजेश पैन्यूली को निर्देश दिया है कि वे ट्रस्ट का पूरा रिकॉर्ड तुरंत बीकेटीसी के अधिकृत प्रतिनिधि को सौंप दें। अदालत ने कहा कि पैन्यूली को सह-रिसीवर के रूप में रखना है या नहीं—यह पूरी तरह बीकेटीसी का विशेषाधिकार होगा।
कोर्ट ने यह भी उल्लेख किया कि बीकेटीसी पहले से ही 48 मंदिरों और धर्मशालाओं, जिनमें ऐतिहासिक बद्रीनाथ और केदारनाथ मंदिर भी शामिल हैं, का सफलतापूर्वक संचालन कर रही है। इसलिए वह ट्रस्ट के उद्देश्यों और उपनियमों के अनुसार इसके प्रशासन के लिए आवश्यक कदम उठाने में सक्षम है।
बीकेटीसी ने फैसले का स्वागत किया
बीकेटीसी के अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने हाई कोर्ट के निर्णय का स्वागत करते हुए कहा कि न्यायालय ने समिति पर जो विश्वास व्यक्त किया है, उसके अनुरूप समिति जिला प्रशासन के सहयोग से सभी आवश्यक कदम उठाएगी। उन्होंने कहा— “हम राज्य की सीमाओं में स्थित सभी हिंदू धर्म स्थलों और मंदिरों के सुचारू संचालन व प्रबंधन के प्रति पूर्ण समर्पण के साथ दायित्व निभाएंगे। बीकेटीसी 1939 से देश की सर्वोच्च धार्मिक कार्यदायी वैधानिक व्यवस्था के अधीन कार्य कर रही है।”
हाई कोर्ट के इस फैसले से ट्रस्ट की संपत्ति के दुरुपयोग पर रोक लगेगी और इसका संचालन अब पारदर्शी व जनहित आधारित तरीके से हो सकेगा।

