Saturday, March 7, 2026
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बच्चों के भविष्य को संवारने में जुटे आशीष नेगी, खुद के वेतन से 40 बच्चों की शिक्षा का खर्च उठा रहे

पौड़ी: कहते हैं सच्चा शिक्षक वही होता है जो बच्चों के जीवन में सिर्फ ज्ञान ही नहीं, बल्कि उम्मीद और आत्मबल भी भर दे। पौड़ी जिले के राजकीय इंटर कॉलेज, कल्जीखाल में सहायक अध्यापक आशीष नेगी ऐसे ही जुनूनी शिक्षक हैं, जो पिछले सात वर्षों से आर्थिक रूप से कमजोर बच्चों की पढ़ाई, हुनर और जीवन निर्माण में निस्वार्थ भाव से जुटे हुए हैं।

टिहरी जिले के देवप्रयाग के मूल निवासी आशीष नेगी अपने वेतन का बड़ा हिस्सा गरीब बच्चों की शिक्षा पर खर्च करते हैं। वे करीब 40 बच्चों की वार्षिक फीस, यूनिफॉर्म, पाठ्य सामग्री, जूते और अन्य शैक्षिक जरूरतें स्वयं पूरी करते हैं। यही नहीं, वे बच्चों को मुफ्त ट्यूशन की सुविधा भी उपलब्ध कराते हैं, ताकि कोई भी बच्चा आर्थिक तंगी के कारण पढ़ाई से वंचित न रह जाए।

“दगड्या समूह” से शुरू हुई उम्मीद की यात्रा

आशीष नेगी ने 2018 में बच्चों को प्रोत्साहित करने के लिए “दगड्या (मित्र) समूह” की शुरुआत की। इस समूह में प्राइमरी से इंटरमीडिएट तक के बच्चे शामिल हैं। एक समय यह संख्या 90 तक पहुंची, वर्तमान में 50 बच्चे सक्रिय रूप से इस समूह से जुड़े हैं और रचनात्मक गतिविधियों में भाग ले रहे हैं।

45 हजार से अधिक बच्चों को दे चुके हैं प्रशिक्षण

चित्रकला विषय के शिक्षक आशीष नेगी अब तक प्रदेशभर के स्कूलों व संस्थानों में आयोजित कार्यशालाओं के माध्यम से 45,000 से अधिक बच्चों को चित्रकला, मुखौटा कला, लुग्दी से मूर्ति निर्माण और रेखांकन का प्रशिक्षण दे चुके हैं। वे बच्चों की सृजनात्मक और मौलिक सोच को विकसित करने के लिए लगातार प्रयासरत हैं।

सृजन क्षमता यात्रा और लोक संस्कृति की अलख

गढ़वाल मंडल क्षेत्र में आशीष नेगी “सृजन क्षमता यात्रा” भी निकालते हैं, जिसके माध्यम से वे युवा पीढ़ी को उत्तराखंड की लोक संस्कृति, लोक कला और चित्रकला से जोड़ने का कार्य कर रहे हैं। इस यात्रा का उद्देश्य बच्चों को अपनी जड़ों से जोड़ना और रचनात्मक सोच को बढ़ावा देना है।

पुस्तकालय, नवाचार और जैविक राखी

दगड्या समूह की पहल पर पौड़ी और एकेश्वर में पुस्तकालय भी स्थापित किए गए हैं, जिनमें पाठ्यक्रम और प्रतियोगी परीक्षाओं से जुड़ी पुस्तकों के साथ-साथ साहित्यिक किताबें भी उपलब्ध हैं। यहां बच्चों को नवाचार के लिए प्रेरित किया जाता है। वर्ष 2021-22 से बच्चे झंगोरा, तिल, चावल और रुद्राक्ष जैसी स्थानीय वस्तुओं से जैविक राखी तैयार कर रहे हैं, जिसे बाजार में बेचा जाता है। इस आय से जरूरतमंद बच्चों की मदद की जाती है।

परिवार से भी मिलता है पूरा सहयोग

आशीष नेगी के इस नेक कार्य में उन्हें उनके परिवार का भी पूरा सहयोग मिलता है। उनका मानना है कि बच्चों के रचनात्मक और सशक्त भविष्य के निर्माण को उन्होंने अपना धर्म बना लिया है।

एक शिक्षक का यह समर्पण आज के समाज को नई दिशा देने वाला है, जहां शिक्षा केवल एक पेशा नहीं बल्कि सेवा का माध्यम बन जाती है। आशीष नेगी जैसे शिक्षक ही असल में भविष्य के निर्माता हैं।

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