Saturday, March 7, 2026
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सर्वोदयी एवं जमनालाल बजाज पुरस्कार से सम्मानित मान सिंह रावत नहीं रहे

कोटद्वार :  गांधीवादी सर्वोदयी नेता एवं जमनालाल बजाज पुरस्कार से सम्मानित मान सिंह रावत का गुरुवार को मुक्ति धाम में अंतिम संस्कार किया गया। विभिन्न सामाजिक, धार्मिंक संगठनों और राजनीतिक दलों से जुड़े लोगों ने उन्हें अंतिम विदाई दी। उनके ज्येष्ठ पुत्र विनय रावत, शील सौरभ व स्नेह देव रावत ने चिता को मुखाग्नि दी।

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने सर्वोदयी नेता मान सिंह रावत के निधन पर गहरा दु:ख व्यक्त किया है। उन्होंने दिवंगत आत्मा की सद्गति के लिए ईर से प्रार्थना करते हुए सभी परिजनों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की है। मुख्यमंत्री ने अपने शोक संदेश में कहा कि स्व. रावत ने समाज को बहुत कुछ दिया है, जिसके लिए उन्हें हमेशा याद रखा जाएगा। सर्वोदयी नेता ने बुधवार देर रात को अपने हल्दूखाता स्थित आवास पर अंतिम सांस ली थी। अपने जीवनकाल में नशे के खिलाफ उनकी लड़ाई अभूतपूर्व रही।

श्रद्धांजलि देने वालों में माता श्री मंगला, भोले महाराज, पूर्व काबीना मंत्री सुरेंद्र सिंह नेगी, महापौर हेमलता नेगी, पूर्व विधायक शैलेंद्र सिंह रावत, पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष दिनेश चंद्र बलोधी, हंस संस्था के प्रदेश प्रभारी पदमेन्द्र सिंह बिष्ट, आर्य प्रतिनिधि सभा से सुरेंद्र लाल आर्य, पूर्व पालिकाध्यक्ष पूरन सिंह रावत, गोपाल बंसल, पूर्व प्रधानाचार्य विनोद कुकरेती, मयंक प्रकाश कोठारी ’भारतीय’, गढ़वाल सभा के अध्यक्ष योगम्बर सिंह रावत, प्रकाश कोठारी, एडवोकेट जगमोहन भारद्वाज, प्रवेश नवानी शामिल रहे।

उधर अल्मोड़ा में गांधीवादी स्तंभ नब्बे वर्षीय मान सिंह रावत के निधन पर यहां एक शोक सभा में सामाजिक कार्यकर्ताओं ने दुख व्यक्त कर श्रद्धांजलि अर्पित की। रानीधारा में हुई शोक सभा में वक्ताओं ने कहा कि रावत सवरेदयी सेवक और भाई के नाम से जाने जाते थे। 1928 में जन्मे रावत ने टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंस से 1952 में स्नातक करने के बाद भी कैरियर की नहीं सोची, जबकि उनके साथ के लोग देश के जाने-माने संस्थानों के प्रमुख बने।

महात्मा गांधी, विनोबा भावे और जयप्रकाश नारायण के विचारों ने उनके जीवन पर इतना प्रभाव डाला कि उन्होंने कोटद्वार को अपनी कर्मस्थली बना कर पूरे जीवनभर प्रेम और अहिंसा ने सामाजिक चेतना को जगाने का काम किया। उन्होंने भूदान आंदोलन में भी शिरकत की और कौसानी में अनाशक्ति आश्रम से प्रेरणा लेकर इस कार्य को अपने क्षेत्र में आगे बढ़ाया।

उत्तराखंड में महिलाओं विशेषकर बोक्सा जाति के उत्थान के लिए वे सदैव याद किए जाएंगे। उत्तराखंड राज्य में जल, जंगल और जमीन से वे गहराई से जुड़े थे। वक्ताओं ने उनके निधन को अपूरणीय क्षति बताया और कि उनका जैसा मिशनरी सामाजिक कार्यकर्ता सदैव हमारी प्रेरणा बना रहेगा। अमन संस्था प्रमुख रघु तिवारी, संरपंच संगठन के गोविंद सिंह महरा, शशि शेखर जोशी, नीलिमा भट्ट, अर्चना लोहनी, मना खत्री, नीमा देवी आदि ने उन्हें श्रद्धासुमन अर्पित किए।

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