Saturday, March 7, 2026
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दिव्यांग बेटे की माँ शोभा को न्याय: डीएम के हस्तक्षेप पर ICICI बैंक ने माफ किया 17 लाख का ऋण, लौटाए घर के कागजात

पिथौरागढ़। जीवन की पहाड़ जैसी चुनौतियों से जूझ रही दिवंगत कर्मचारी की विधवा पत्नी और उनके दो मासूम बच्चों को आखिरकार न्याय मिल गया। 17 लाख रुपये के बीमित ऋण के बावजूद लगातार प्रताड़ना झेल रही शोभा देवी को जिला प्रशासन की सख्ती और डीएम के हस्तक्षेप के बाद बड़ी राहत मिली है। ICICI बैंक ने सोमवार को स्वयं उनके घर जाकर ‘नो ड्यूज’ प्रमाणपत्र सौंपा और घर के कागजात लौटाए।

शोभा देवी का जीवन पति की आकस्मिक मृत्यु के बाद पूरी तरह बदल गया था। एक ओर दो बच्चों की परवरिश की जिम्मेदारी, दूसरी ओर शत-प्रतिशत दिव्यांग बेटे की विशेष देखभाल — ऐसे में बैंक द्वारा बार-बार ऋण वसूली के नाम पर की जा रही प्रताड़ना ने उनका जीवन और भी कठिन बना दिया था। जबकि जिस ऋण की वसूली की जा रही थी, वह बीमित ऋण था — यानी ऋणधारक की मृत्यु पर वह स्वतः माफ हो जाना था।

डीएम से मिलाया दर्द, शुरू हुआ प्रशासनिक एक्शन

विगत सप्ताह, शोभा देवी अपने दोनों बच्चों के साथ देर शाम कलेक्ट्रेट पहुंचीं और डीएम से अपनी पीड़ा साझा की। डीएम ने मामले को गंभीरता से लेते हुए एसडीएम न्याय कुमकुम जोशी को तुरंत जांच और फॉलोअप के निर्देश दिए। पिछले 10 दिनों से लगातार एसडीएम मामले की निगरानी कर रही थीं, और बैंक को स्पष्ट चेतावनी दी गई थी कि यदि सोमवार तक नो ड्यूज प्रमाणपत्र जारी नहीं किया गया, तो बैंक शाखा की सम्पत्ति कुर्क कर नीलामी की कार्रवाई की जाएगी।

प्रशासन के दबाव में झुका बैंक, लौटाए कागजात

प्रशासन के सख्त रुख के आगे आखिरकार ICICI बैंक को झुकना पड़ा। सोमवार को बैंक प्रतिनिधि शोभा देवी के घर पहुंचे और उन्हें नो ड्यूज सर्टिफिकेट सौंपा, साथ ही घर के सभी मूल दस्तावेज भी लौटाए।

जनता में प्रशासन की सराहना, डीएम की कार्रवाई की प्रशंसा

इस घटना के बाद आम जनता में प्रशासन की तेजी और संवेदनशीलता को लेकर खूब सराहना हो रही है। शिक्षा, रोजगार, ऋणमाफी और संपत्ति सुरक्षा — हर मोर्चे पर लगातार सक्रियता दिखा रहा जिला प्रशासन, आम लोगों में भरोसा जगा रहा है।

“समस्या चाहे कितनी भी विकट हो, जिला प्रशासन है न”: जनता की प्रतिक्रिया

बैंकिंग सिस्टम की जटिलताओं और असंवेदनशील रवैये के बीच, प्रशासन ने यह साबित किया कि सही समय पर की गई कार्रवाई न सिर्फ न्याय दिला सकती है, बल्कि सामाजिक भरोसे को भी मजबूत करती है। शोभा देवी और उनके दिव्यांग बेटे के चेहरे की मुस्कान इस बात का प्रमाण है कि संवेदनशील प्रशासनिक पहलें समाज में कितना बड़ा फर्क ला सकती हैं।

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