Saturday, March 7, 2026
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भूकंप से बचाव के लिए प्रदेशभर में मॉक ड्रिल शुरू, पहली बार डिजिटल ट्विन तकनीक का इस्तेमाल

उत्तराखंड में भूकंप से बचाव और आपदा प्रबंधन की तैयारियों को परखने के लिए आज प्रदेशभर में बड़े पैमाने पर मॉक ड्रिल शुरू हो गई। पहाड़ से लेकर मैदान तक एसडीआरएफ, डीडीआरएफ, एनसीसी, होमगार्ड्स और पीआरडी के जवान इस अभ्यास में जुटे हुए हैं। थराली, हरिद्वार और देहरादून में सुबह 10 बजे से ही अभ्यास की शुरुआत हो गई थी।

डिजिटल ट्विन तकनीक बनी मॉक ड्रिल की खासियत

इस बार मॉक ड्रिल में आधुनिक डिजिटल ट्विन तकनीक का उपयोग किया जा रहा है। यह तकनीक किसी भवन या स्थान की डिजिटल प्रति बनाकर वास्तविक परिस्थितियों की सटीक नकल करती है। इससे आपदा के दौरान होने वाली संभावित स्थितियों का बिना किसी जोखिम के अभ्यास संभव हो पाता है।

आपदा-संवेदनशील उत्तराखंड में तैयारी ज़रूरी

उत्तराखंड भूकंप, भूस्खलन और बाढ़ जैसी आपदाओं की दृष्टि से अत्यंत संवेदनशील है। ऐसे में पूर्व तैयारी, समुदायों का क्षमता विकास और नियमित प्रशिक्षण बेहद महत्वपूर्ण हैं। इसी उद्देश्य से राज्य में व्यापक मॉक ड्रिल आयोजित की जा रही है, जिससे सभी जिलों की तैयारी और प्रतिक्रिया क्षमता का परीक्षण किया जा सके।

मॉक ड्रिल में शामिल किए गए परिदृश्य

अभ्यास को अधिक वास्तविक बनाने के लिए कई परिस्थितियों का सिमुलेशन किया गया, जिनमें शामिल हैं—

  • बहुमंजिला आवासीय भवन का ढहना
  • अस्पताल भवन के आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त होने के बाद राहत कार्य
  • स्कूल और कॉलेज भवनों के क्षतिग्रस्त होने से छात्रों का फंसना
  • बड़े पैमाने पर रेस्क्यू और राहत अभियान

यह मॉक ड्रिल राज्य की आपदा तैयारियों को परखने और भविष्य की आपदाओं से निपटने की क्षमता को और मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

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